Sunday, March 14, 2021

फुल परसा को फुले ( भोयरी कविता )

फुल परसा को फुले 
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

रुत बसंत की आई
प्यार सिवार म घुले
लागी जंगल म आग
फुल परसा को फुले ।१।

ढ़ंग न्यारो परसा को
रंग स्येंदरी गा खुले
सूर्व्य उतरे भूई प
फुल परसा को फुले ।२।

जोस परस ला मोठो
घोस मोठाजात झुले
होस खोवस सिमगो 
फुल परसा को फुले ।३।

तीन पत्ता तीन लोक
देव मानुस बी भुले 
असी रंगी रासलीला
फुल परसा को फुले ।४।

राजो सिवार को सोभे
मस्तराम हाले डुले
आंगोपांग तेज उले
फुल परसा को फुले ।५।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

3 comments:

  1. बहुत ही सर्जरी कविता लिखी है आपने परसा के फूल फागुन को त्यौहार और बसंत बहार की बढ़िया शानदार कविता अभिनंदन भैया जी

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