बोली अन् भास्या
Bhoyar culture_ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
अ ) बोली : संकल्पना अन् स्वरूप
बोली या रोज क वेव्हार को स्वाभाविक साधन स . तोंडी परंपरा कन् आवस तेकन वोकऽ आंग म येक परकार को जितोपन रव्हस . वा साधी च पर परिनामकारक रव्हस . वकी स्वाभाविकता इच वकी खासियत !
सरकारी कामकाज , लेखी वेव्हार , सिकन साठी बोली को बापर होत नी . पर आब प्रायमरी सिकस्यन साठी बोली ला बापरनो चालू भयेस .
ब ) बोली कसी बनस
बोली , भास्या येक सामाजिक संस्था स . आन् जागा न बेरा ( कार ) क कारन कन् वा बदलत जास . वोम बदलन की ताकद रव्हस . समाज मंझार लोगना बेगरा बेगरा गट करकन् रव्हस . इ गट सामाजिक , राजकीय , आर्थिक , कामधंदा , बेपार , पढाई , जात असो कोनतो बी रव सकस . असा गटना की आपलऽ गट पुरती खास भास्या बनस . वा सबन समाज बापरस वोनऽ भास्या सिन कयी बाबद म फरक धरकन् रव्हस . इ गट च बोली बनन को कारन रव्हस . थोडका म समाजजीवन म आपरंग च बेगरा बेगरा गट बनत रव्हस आन् वोनऽ गट क जगन क तरीका ला भायेन असी भास्या रूप धरस आन् वोमिन बोली को जलम होत रव्हस .
क) बोली की खासियत
परमान भास्या बोलनी वाला लोग सबन किथिन सुधऱ्या रव्हस , बोली बोलनारा लोग सबन बात म पासऽ रव्हस , सरकारी - सिकस्यन पानी , धरम क गोस्ट साठी परमान भास्या च बापरस तेकन बोली हलकी रव्हस असी लोगना की समजूत भयीस . बोली या वकऽ गरज पुरती पुरी विकसित भास्या स . हर बोली का आपला उच्चारन अन् व्याकरन का कयी नियम रव्हस . बोली को पुरो अभ्यास करन क बाद बोली असुध्द रव्हस नी त बोली का उच्चारन गलत रव्हस , असो कवनो येकदम गलत स . बोली या सव टका भासिक रूप स . बोली या लिखन की भास्या बनूच सकत नी या गलत धारना स . दुनिया म खूब मोठो लिखान बोली म होतानी दिसस . तेकन बोली म लिखान पेलन की ताकद स , या बात सिध्द होस .
बोली ला व्याकरन अन् भासिक संरचना नी रवत या गलतफह्यमी स .
बोली या भास्या को परिपूर्न रूप स .
लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
साजरो लिख्यो है भाउ जी
ReplyDeleteधन्यवाद जी 🙏
Deleteखूप साजरी जाणकारी।
ReplyDeleteधन्यवाद जी 🙏
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