अजब गजब - ५२ : कुमारी मेघा परमार
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
कोनती बी बात केतरी मोठी होयेन , यको बोलचाल अन् साहित्य म नाप स हिमालय ! देस क महादेव मुखी हद क राखन साठी हिमालय की मोठ्ठीजात दिवाल स . भगवान भोलेनाथ अन् सरग को स्थान हिमालय !
हिमालय की पुरी दुनिया म सबसिन उच्ची चोटी ' माउंट येवरेस्ट '. वोला च नेपाली म ' सागरमाथा ' कोस . हरेक को सपनो रव्हस क , वोपर चेंगकन सरग को आन् आपलऽ हिम्मत को दरस्यन करनु . उंगल प गिनती करन लाईक लोगना को इ सपनो पुरो होस . येनऽ सपना ला पह्यल ऽ डाव पुरो करेस मध्यप्रदेस आन् आपलऽ समाज की पोटी , ' कुमारी मेघा परमार ' न !
मध्यप्रदेस क सीहोर जिला म उलझावन गाव क जवर येक गाव स ' भोज नगर ' . कुलपुरुस चक्रवर्ती राजा भोज क नाव क येनऽ गाव म जलम लेयो भोजवंसी कुमारी मेघा परमार न , जिन न मध्यप्रदेस , देस आन् समाज को नाव मोठो करे . भोजपाल परिन इ गाव ५० कि.मी. दूर स .
भोजनगर क दामोदर जी परमार अन् मंजू देवी येनऽ कास्तकार माय - बाप की येकली पोटी को नाव मेघा . नानपन पासिन च मेघा न येवरेस्ट पर चढ़न को सपनो देख्योतो . माय - बाप न बी वोकऽ सपना ला पुरो करन साठी साथ देयी . गाव म मेघा क बराबर वाली पोटीना को बिह्या भय रह्येतो . लोगना बी वोकऽ मायबाप पर बिह्या साठी जोर डाय रह्याता . माय - बाप न मेघा सिन येनऽ बारा म बात करी त् मेघा न कह्ये क , ' मला थोडो बखत देव , मु असो काम करून क तुमाला अभिमान वाटेन .' येनऽ घटना क बास्त मेघा न येवरेस्ट प चढ़न की बानी धरी आन् वोमऽ वा सफल बी भयी . येवरेस्ट प चढ़न क दुय बरस पह्यले मेघा को पीएचडी साठी नंबर लाग्येतो . पर येवरेस्ट क चढाई की तयारी साठी वोला पढ़ाई थांबाडनी पडी . मेघा रवींद्रनाथ टागोर विस्वविद्यालय म एम एस सी योगा सीख रह्यीती .
फिजिकल फिटनेस साठी मेघा ला रोज घाडी मेहनत अन् मानसिक फिटनेस साठी योग , प्राणायाम करत होती . वोकऽ तन मन म येवरेस्ट चढ़न की च धुन , जिद होती . येवरेस्ट क माथा पर चढ़न की वकी जिद ला माय - बाप , ट्रेनर रत्नेस पांडे अन् आए ए एस अफसर एस. आर . मोहंती सर को मोठो सहारो भेट्ये . मेघा रोज सीहोर पासिन भोजपाल पावतर साइकल चलावत होती .
पह्यलऽ डाव मेघा को सपनो सिरफ ७०० फुट क दूरी कन् टुट्यो . पर मेघा न हिम्मत नी हारी . खूब मेहनत करी . आन् २२ मार्च २०१९ ला झुंझुरका च पाच बाजता येवरेस्ट क माथा पर पाय धरे .
* येवरेस्ट प चढ़ाई क बेरा हरदम पानी नी भेटत . हर बखत बदन अंदरसिन टुटस . सास लेन ला घाडी तकलिफ होस . चढ़ाई क बेरा हात पाय लटलट कापस . रस्ता म चढ़ाई करनी वालाना की लास बी दिसस . माथा प पुग्या बास्त अॉक्सिजन की खूब कमी होय जास .
* मेघा कोस क ,' जिंदगी साठी प्यार सिन जास्त जरुरी आॅक्सिजन स , तेकन आमी न झाड पेड लगाया च पायजेन .'
* माउंट येवरेस्ट क माथा पर मेघा न तिरंगो फह्यराये आन् वहान सीहोर की माती अन् पत्थर धऱ्या .
* माउंट येवरेस्ट क माथा पर चेंगनी वाली २४ बरस की मेघा मध्यप्रदेस आन् समाज की पह्यली च बेटी स .
* मेघा न येवरेस्ट संग च दुनिया क चार खंड की सबसिन उच्ची चोटी पर चढ़न को बी रिकार्ड बनायेस .
* महिला बाल विकास अभियान , ' बेटी बचाओ , बेटी पढ़ाओ ' की मेघा " ब्रांड एम्बेसडर " स .
लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
मेघा ने मेघ बनकर एवरेस्ट को छू लिया। आपने अपनी बोली भाषा में बहुत ही साजरो लिख्यो है। अभिनंदन
ReplyDeleteधन्यवाद जी 🙏
Deleteखूब साजरी जाणकारी।अभिनंदन मेघा परमार को।
ReplyDelete