Monday, March 1, 2021

नारी ( भोयरी कविता ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

नारी ( भोयरी कविता )
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

माय सती को वारसो
गंगा ममता की नारी
देव देवांगन फिका
तूच चारी धाम पुरी ।१।

रूप कामधेनू धरे
पर तनखारो भारी
सीता लक्षुमी दुरगा
अवतार नवरात्री ।२।

हर नातो तोरो प्यारो
तूच कैकयी गंधारी
अपरमपार लीला
तलवार दुयधारी ।३।

घर द्वार तोरऽ पायी
तूच जीवन की मुरी
मोह्यरज की धनीन
तूच स्यहद की पुरी ।४।

वंस बेल को कलस
गुनवान तू हरारी
फुल वानी सकवार
करे सिंव्ह की सवारी ।५।

दुख हिरदा म धरे
सुख मुंडा प जर्तारी
घरदार को चैतन
नारी जीव चमत्कारी ।६।

मन सत तुरसी को
घर की मयाल नारी
अनपुरना को रूप
तूच पूंजा की चवरी ।७।

मनगट झनकार
बिल्लोर की कलाकारी
पायपट्टी पयजन
सरगम ला बी भारी ।८।

तोरऽ माथा क कुकू की
सूर्व्या पर स उधारी
भाई चंदर चादन्यो
दूर करस अंधारी ।९।

घिसे चंदन सरखी
कुपी अत्तर की न्यारी
उपे कपूर क वानी
गंध सुगंध की क्यारी ।१०।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

4 comments:

  1. नारी शक्ति की साजरी रचना अभिनंदन भैय्या जी

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  2. खूब साजरी कविता।

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