मन ( भोयरी कविता )
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
मन चिलाटी का काटा
वरबाडे सारो आंग
खाज खाजखुयरी की
पुरो तडपाये आंग ।१।
मन तंदरी को गाव
चाली माकोडा की रांग
भेट्या येक दिन पंख
मंग भूई प धडांग ।२।
मन चकवो चांदन्यो
निरी फाकीस गा भांग
खलऽ वरतऽ झकोला
नव गिऱ्या को पंचांग ।३।
मन आस भास छाया
वकी अगास म टांग
कब कहान जायेन
नही लागे पत्तो थांग ।४।
मन माया को घंगार
वको वरतऽ मचांग
झर झर पाझरे जी
बह्ये गंगा दुय आंग ।५।
रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
खुप साजरी रचना।
ReplyDeleteधन्यवाद सर 🙏
Deleteखूब साजरी
ReplyDeleteधन्यवाद जी
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