Saturday, March 20, 2021

अजब गजब - ५३ : धार संस्थान. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ५३ : धार संस्थान
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

बेरन पहाडी क मंझार स्थापित धार नगर की उतपत्ती राजा मुंज वाक्पति संग जुडीस . तलवार क पत्ता को गाव येनऽ मतलब को ' धारलांग ' नाव को गाव पह्यले यहान होतो . ९ वी सदी पासिन १४ वी सदी पावतर धार म परमार राज रह्ये . कयी बरस धार राजधानी रही . बाद म हिफाजत क हिसाबकन् राजधानी मांडवगड ला बनायी . राजा भोज क बेरा म धार सिकस्यन को मोठो ठानो होतो . भोजस्याला वको केंद्र होतो . दुनिया भर म यहान की पढ़ाई मसहूर होती . 
१४ वी सदी म यहान मुगलराज आये . 
इ.स. १७२८ म बाजीराव पेसवा न मालवा प सवारी करी . तब वून क संग रामोजी सिंदे , मल्हारराव होलकर आन् उदाजी पवार होता . जित्या बास्त धार अन् वोकऽ अगल बगल का ३८ गाव की जागीर उदाजीराव ला भेटी .  धार संस्थान मराठा राज क कब्जा म आये . इ.स. १७३२ म सामंत आनंदराव पवार क रियासत की धार राजधानी बनी . अंगरेज राज म धार संस्थान को ४६०८ वर्ग कि.मी. को इलाखो होतो . वकी सालाना कमाई १६.५ लाख रुप्या होती . धार संस्थान ला पंधरा तोफ क सलामी को मान होतो . 
आनंदराव को पोरग्यो यसवंतराव इ.स. १७६१ म पानिपत क लढाई म काम आये . 
राघोबा दादा न धार ला आसरो लेयेतो . वहान च दुसरऽ बाजीराव को जलम भये . 
इ.स. १८०७ म दुसरऽ आनंदराव को सर्गवास भयो . वोकऽ बाद धार संस्थान म मांडव , धार , धरमपुरी येतरा च परगना बाच्या . आघऽ दासीपुत्र मुरारराव न बगावत करी . वोन बेरा बडोदा क बापू अन् रघुनाथ सिंद्या क सहारा कन् रानी मयनाबाई न धार संस्थान बाचाडे . 
इ.स. १८१९ पासिन धार संस्थान अंगरेज क मालवा पलटन साठी सालिना ६०००/ रुप्या देत होता . इ.स. १८५७ म धार संस्थान जबत भयेतो जी इ.स. १८६४ ला वापिस भेट्ये , पर वोन बेरा बेरसिया परगनो हरदम साठी भोपाल ला देना म आये . 
इ.स. १९४८ म धार संस्थान  ' मध्य भारत संस्थान संघ ' म सामिल भये . चवथा आनंदराव महाराज येन संघ का कनिस्ट उपराज्य परमुख बन्या . 
१ नवंबर १९५६ म धार संस्थान मध्य प्रदेस राज्य को हिस्सो बन्यो . 

लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

6 comments:

  1. खूप साजरी माहिती।

    ReplyDelete
  2. हमारी इतिहासिक नगरी की खूब सारी जानकारी आपने अपनी बोली भाषा में लिखी अभिनंदन जी

    ReplyDelete
    Replies
    1. धन्यवाद नन्दलाल जी 🙏

      Delete
  3. खूप छान माहिती, सुरेशजी🙏🙏

    ReplyDelete