Wednesday, March 17, 2021

धुड्डी ( भोयरी कविता ) . bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

धुड्डी
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

आयो सिमगो रंगीलो
देखो आखरी तिवार
तन मन झनकाऱ्यो
रुत बसंत बहार ।१।

साल भर क दुख ला
होरी मंझार म बार
संग धुपट इपट
उपे अगास क पार ।२।

देवो होरी ला निवद
गाठी चाकोली की मार
गावो गानो फगवा को
सोडो गारी गुफतार ।३।

देये फुल परसा को
रंग भायी जोरदार
खेले धुड्डी पोटुबाटु
भिज्या सारा नर नार ।४।

नाना मोठा संगी साथी
भय गया येकसार
रंग अबीर गुलाल
गंगा जमुना क पार ।५।

रंग धुड्डी को जी गुनी
भरे असार म सार
सुख दुख क साल ला
करे हासीखुसी सार ।६।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

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