अजब गजब - ५१ : पंचमुखी महादेव , धराड
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
आमारऽ देस आन् परदेस म कई देवना की पूंजा होस , पर भगवान भोल्यानाथ की महिमा सबसिन येतरी मोठी स क वून की पूंजा हर जागा प होस . बेद म भगवान सिव जी ला ईस्वर आन् रुद्र क नाव कन् वून को मोठोपन दिखाडेस .
यजुरबेद क अकरावऽ अध्याय क ५४ व मंतर म कह्येस क , रुद्र देव न भूलोक की रचना करीस आन् वोला सूर्व्यदेव न उजारे . रुद्र देव की परचंड जोत या बाकी देवताना क बनन की स्यक्ती स . भगवान सिव पह्यलो भगवान स जिन न धरती की रचना कर कन् आपलऽ तेज कन् बाकी देवताना ला तेजस्वी बनायो .
मध्यप्रदेस क महू नीमच हायवे पर धराड गाव स . रतलाम परिन धराड ११ कि.मी. दूर स . धराड गाव म अतिदुरलभ पंचमुखी महादेव मंदिर स , वोला च महाकाल मंदिर बी कोस . येनऽ देऊर ला तीन तल्ला स . खलतऽ पंचमुखी महादेव , वोकऽ वरतऽ क तल्ला प महाकाल आन् वोकऽ वरतऽ साधना की जागा स . पुरानऽ जमाना म यहान रिसी मुनी , साधु संत साधना करत होता .
इ देऊर १२ व सदी म परमार राज म बांध्येस . पह्यले येनऽ देऊर ला ' फूटला देऊर ' क नाव कन् वरखत होता .
इ.स. १९५० म यहान रमत गमत संत सुंदर गिरी जी महाराज पुग्या . तब देऊर की खसता हालत देख कन् वून ला घाडो दुख भये . वून न पन ले क जवरिक देऊर को जिरनोधार नी होयेन तवरिक वूई उपास धरेन . वोकऽ बास्त गाववाला न देऊर ला सुधारे , जेला दुय बरस लाग्या . देऊर सुधार का बास्त गिरी जी महाराज का गुरू आया आन् वून न मूंग दार क पानी कन् गिरी जी महाराज को दुय बरस को उपास तोड्ये .
रतलाम की बसावट यी धराड सिन भयी . सब सिन पह्यले महाराज रतनसिंग जी धराड आयाता .
उज्जैन क बाद म धराड ला च महादेव महाकाल स .
खासियत : * कोनतऽ बी देऊर म दुय सिवलिंग नी रव्हत . पर येनऽ देऊर म मंझार क तल्ला प महाकाल भगवान बिराज्यास . अन् ठीक वोकऽ खलतऽ गाभारा म पंचमुखी महादेव सिवलिंग स . पुरऽ नरबदा अंचल म असो सिवलिंग नहाय , तेकन येनऽ देऊर ला अति दुरलभ मानस .
* सिव ला पंचमुखी आन् धा ( दस ) हात वाला मानस . सिवजी क पसचिम मुख की पूंजा धरती तत्व क रूप म करस . उत्तर मुख की पूंजा पानी तत्व क रूप म, दकसिन मुख की पूंजा तेजस तत्व क रूप म आन् पूरब मुख की पूंजा वायु तत्व क रूप म करस . भगवान सिव क वरतऽ ( उर्ध्व ) क मुख की पूंजा अगास तत्व क रूप म करस . येनऽ पाच तत्व की उपज भगवान सदासिव सिन भयीस . येनऽ पाच तत्व कन च सारऽ चराचर जगत की उपज भयीस .
* पंचमुखी महादेव को पूरब मुख ' सृष्टी ' , दकसिन मुख ' स्थिती ', पसचिम मुख ' प्रलय ', उत्तर मुख ' कृपा ' आन् वरतऽ ( उर्ध्व ) को मुख ग्यान का सूचक स .
* भगवान सिव को वरतऽ को मुख ईस्यान दूध क रंग को , पूरब मुख तत्पुरुस पिवरऽ रंग को , दकसिन मुख अघोर निरो रंग को , पसचिम मुख सद्योजात पांढरऽ रंग को आन् उत्तर मुख वामदेव कारो रंग को स .
* भगवान सिव ला ' त्रिनेत्र ' कह्येस . इ तीन डोरा मनजे सूर्व्य , चंदर अऊर वहनी होय .
* येनऽ देऊर ला केतरा खंबा स , यकी आजवरी कोनीच गिनती नी कर सक्यास . हर बार बेगरी बेगरी गिनती आवस .
मान्यता : * यहान महारुद्र होम हवन होस . पूरनाहुती क दिन यहान नि: संतान बाईलोगना खीर को परसाद लेस . यकन वून ला संतान को सुख भेटस , असी मान्यता स .
* सिवरातरी आन् सरावन मह्यना म पंचमुखी महादेव की पूंजा गंगाजल , पंचामृत आन् पंचपल्लव कन करनु . पाच पत्ता ( पंचपल्लव ) म पीपर , उंबर , बड , पिलखन का पत्ताना पानी म डायकन् वोनऽ पानी कन् पूंजा करनु . यकन सिवजी तुरुत परसन्न होस , तमाम दोस को नास होस आन् आसिरवाद भेटस , असी मान्यता स .
रचना : इ देऊर नागर ( भूमिज ) रचना को स . येनऽ देऊर ला अरधो मंडप ( अर्धमंडप ) , मंडप आन् गाभारो स , जेम को अर्धमंडप खस गयेस . येनऽ देऊर का खंबा , दरुजा आन् मूरतीना देखनी लायक स .
* इ देऊर इ.स. १९८२ पासिन पुरातत्व विभाग म गयेस .
# यहान की देखभाल पुजारी सत्यनारायन बयरागी आन् महाकाल समिति करस .
( सहयोग : इंजि . जालमसिंग सोढ़ा जी , जोधपूर )
लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
खूब साजरी जाणकारी
ReplyDeleteधन्यवाद जी
Deleteहर हर महादेव 🙏
ReplyDeleteहर हर महादेव
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