भोयरी संस्कृति - ३९ : आहेर ( अहिर )
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
जिता सभा वस्त्रवता मिष्टाशा गोमता जिता ।
अध्वा जितो यानवता सर्वं शीलवता जितम् ।।
_ विदुर
आपलऽ समाज म कपडा बाबद जी संस्कृती बनीस , वोम ऽ कपडा देन क ( आहेर ) रितीरिवाज को मोठो हात स . कपडो आपलऽ समाज को आदर सनमान को विस्यय रह्याकन कयी रितीरिवाज बन्यास . कोनतऽ परथा म प्रतीक क रूप म त कोनतऽ परथा म सीधो ' कपडो ' इ मुख्य रव्हस . कपडा देन क रिवाज ला च आहेर कोस .
राजालोगना क जमाना म ' कपडो देनो ' यको मतलब ' अधिकार देनो ' असो होतो . जेला जी अधिकार पद भेटे होयेन , वोला पद क अनुसार खास कपडा देना म आवत होता .
* आहेर देन का नेम नियम बी स . सभा / समारोह म कोनी को मान सन्मान करन को होयेन त् वून ला स्याल देस . कहान कहान दुपटो ( सेलो ) त कहान फेटो - पगडी देस .
* पोरा क तिवार ला गडी मानुस ला जेवनी क संग च सिरपाव ( आहेर ) देस . गायगोंधन क दिन गायकी अन काम्बरकीवालाना ला गाय परीन वोवारकन कपडा को सिरपाव आन् जेवनी देस .
* बिह्या स्यादी म त आहेर को खास महत्त्व स . मांडो म हरद क दिन लाडा , लाडी का मायबाप बोह्यला प बसकन नातलग किथीन आहेर लेस . येखांदी पोटी नी त बाई जवर च बसकन कोनी न कोनतो आहेर करेस , ती कागद पर मांडस . बाद म लगन घर की बाई तमाम गनगोत ला आहेर करस . मांडो सुतनीवालऽ जवाई आन पोटीना ला बी आहेर करस .
* बिह्या क पह्यले च लाडी साठी ; लाडा किथीन हरद कुकू की साडी आन बिह्या को खेंडो / स्यालू पठावस .उसोच लाडी किथीन लाडा का कपडा पठावस .
* पह्यलऽ क बेरा म जब खासर - रेंगी कन बरात जात होती तब जानोसा पर थांब्या इन - इव्हाई अन् सोयराना ला गाज्याबाज्याकन लायकन नहान करत होता , तब वून ला धोतर - लुगडा पेहरवत होता .
* बिह्या भया बाद उनारा म पोटी , जवाई , इन , इव्हाई आन बाकी जवाई घर क लोगना ला ' आंबा क पाव्हना ' पर लाय कन पाहुनचार करस आन् आहेर करस . उसाच बू कितऽ क लोगना ला बी ' आंबा क पाव्हना ' पर लाय कन पाहुनचार करस आन् आहेर करस .
* बिह्या भया बाद पह्यलऽ दिवारी ला पोटी - जवाई ला नहानन ला ल्यावन साठी जास . वून ला लाय कन पाहुनचार अन् आहेर करस .
* बिह्या भया बाद पह्यलऽ संगरात म पोटी की माय अन बाकी बाईलोग जवाई क घर पायधूनी साठी जास . तब जवाई क घर क तमाम लोगना ला आहेर करस .
* पोह्यती म बहुड्डो उजवन साठी पोटी माहेर ला आवस . मोठऽ गाज्या बाज्या कन् बहुड्डो उजवस . तब माहेर किथीन पोटी ला आहेर करस .
* सातवो मह्यनो सासुरवाडी म होस . तब बू ला साडी को आहेर देस .नव्वो मह्यनो माहेर म होस तब पोटी ला हिवरी साडी को आहेर करस .
* बारसा ला पोटू / पोटी अन वोकऽ माय नातलगना साडी- कपडा को आहेर देस .
* वास्तुक क बेरा घर क मालक - मालकिन ला गनगोत कपडा को आहेर देस .
* सवासीन बाई मयत भया पर वोला माहेर किथीन साडी / लुगडो देयकन बोरवन करस .
* जेनऽ घर मयत भयी , वहान क तेरवी / चवदावी ला मानुस लोगना ला दस्ती - दुपटो आन बाईलोगना ला झ्यांपर पिस देकन दुखवटो करस .
* मयत भयी वोनऽ घर क नातलग ला आपलऽ घर ल्यायकन धोतर- लुगडा पेहरवस .
* जलम पासीन मरन पावतर कपडा को इ मान भोयरी संस्कृति म देखन ला भेटस . नातलग , सगा सोयरा पासीन गडी मानुस अन् काम्बरकीवाला पावतर आहेर को इ मान भोयरी संस्कृति की पह्यच्यान स .
# आब ऽ बिह्या क पतरिका म ' आहेर परथा बंद ' असो लिख्यो देखन ला भेटस .
# आब क जमाना म टेलर का बाहाड्या रेट कन् कपडा सिवन ला पुरत नी . रेडिमेड कपडा पेहरन क चलन को जमानो स . असा म आहेर म आया प्यांट आन् मनिला क पिस को का करनु... सिवन ला डाये त घडाई परस मढाई जास्त ! तब वून पिसना ला दुसरा ला आहेर करन साठी धरकन राखस ...
# आहेर म आयी अरधी परधी साडी - लुगडाना कोनीच पेहरत ( नेसत ) नी . वून ला आघऽ क आहेर म सरकवस .
# आहेर साठी नगदी पयसा देयकन , वून ला च आपलऽ पंसद का कपडा खरीदन ला कव्हन को बी रिवाज बाहाडेस .
( सहयोग : पार्वतीबाई महादेवराव देशमुख )
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
अहिर प्रथा को अपनी बोली भाषा में लिखा बहुत ही साजरो लिख्यो है। अभिनंदन भैय्या जी
ReplyDeleteधन्यवाद जी
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