भोयर अन् नदी माय - ७ : सिंधू नदी
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती ।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जलऽस्मिन्सन्निधिं कुरु ।।
_ ऋग्वेद
भारतीय संस्कृती आन् साहित्य म सिन्धु नदी माय की मोठी महिमा स . सिन्धु नदी क कोरा म सुरवात क मानुस जीव क पैदाइस पासिन महान संस्कृति पावतर का लोगना पल्या... बाहाड्या !
इ.स. क ३००० बरस पह्यलऽ पासिन सिन्धु नदी न महान संस्कृति घडायी , जेला आमी मोहेंजोदडो हडप्पा संस्कृती कवजेन . आब क अनुसार या सिन्धु संस्कृती अफगाणिस्तान , पाकिस्तान , भारत आन् तिबेट पावतर फयलिती .
* सिन्धु नदी का नाव : संस्कृत - सिंधु ( नदी ) , ग्रीक - सिंथोस , ल्याटिन - सिंदुस , परसियन - हिंदु , रोमन - इंदुस , इंग्रजी - इंडस , वाल्मिकी रामायण - महानदी , वेद - सिन्धु , हिन्दु .
सिन्धु नाव वेद म नदी , समुंदर , मोठी जल रासी ला बी देयेस .
सिन्धु नदी क नाव कन् च दुनिया न आमारऽ देस ला इंडिया नाव देये आन् वोकऽ नाव कन् च आमारऽ धरम ला हिन्दू नाव भेट्ये .
* सिन्धु नदी को उद्गम तिबेट क गेजी काउंटी म कयलास परवत पासिन उत्तर पूर्व म १०० कि.मी. दूर स . हिमालय आपलो सरग ! सिन्धु , पंचनदी , गंगा , यमुना इ नदीना आन् ब्रम्हपुत्र या नद हिमालय मिन च निकरीस . ३६०० कि.मी. लंबी सिन्धु नदी दकसिन म अरब सागर ला भेटस . वोला तिबेट , भारत , पाकिस्तान आन् अफगाणिस्तान की नदीना आय कन् भेटस . कहान कहान वोको पातर कयी कि.मी. स . २०० बरस पह्यले पावतर सिन्धु नदी गुजरात क कच्छ क रन मिन अरबी समुंदर म जात होती . आन् वा पह्यले आब क जागा पासिन ११० कि.मी. पूरब म समांतर जात होती . सिन्धु नदी न कयी बेरा आपली जागा बदलीस . वोकऽ कारन च वहान क पह्यलऽ क संस्कृती को नास भये . सिन्धु नदी न हिमालय का दुय टुकडा कऱ्यास . सिन्धु नदी पासिन क पसचिम हिमालय ला हिन्दुकुस परवत कोस .
* सिन्धु नदी दुनिया की सबसिन मोठी नदी नाईल सिन बी डबल पानी बहावस .
* भारतीय सभ्यता , वैदिक धरम को उद्गम आन् फयलाव सिन्धु अन् सरस्वती नदी काठ च भये . वोकऽ कयी बरस बाद या संस्कृती गंगा नदी काठ गयी आन् बाहाडी .
* मुलतान म सिन्धु - चिनाब क थडी पर सिरी किस्न भगवान को पोरग्यो साम्ब क याद म सूर्व्यदेव को देऊर बनायतो . कोनार्क क सूर्व्य मंदिर सरखी च येकी रचना होती . येनऽ देऊर को वरनन महाभारत म स .
* धृतराष्ट्र की पोटी दु:शाला को लाडो जयद्रथ सिन्धु देस को राजो होतो .
* सिन्धु नदी क मुहाना प ( हिंगोल नदी क काठ पर ) बलुचिस्तान क हिंगलाज नाव की जागा स . कराची पासिन १४४ कि.मी. दूर उत्तर पसचिम म येनऽ जागा पर हिंगलाज माय को ठानो स . इ पीठ ५२ स्यक्तिपीठ मिसिन येक स .
* रघुवंस पोथी क अनुसार भगवान सिरी रामजी न सिंध देस भरत ला देयेतो .
* इ.स. १९४७ म आपलऽ देस का टुकडा भया , हिंदुस्थान आन् पाकिस्तान . आन् आपलऽ संस्कृती को मुर ( सिन्धु ) पाकिस्तान म गयो .
* ५००० बरस पासिन सिन्धु नदी क कोरा म को सिन्ध प्रांत कला अन् साहित्य च नी त् बेपार धंदा म बी आघऽ होतो .
आब क सिंध प्रांत क कापरी गोठ , समारो , खिपरो , जमेसाबाद , मिर के गोठ , मिरपुर खास , हयदराबाद , फुलादिया येनऽ गाव - स्यहर क भाग म भोयरी संस्कृति फयलीती . इ भाग आब क गुजरात आन् राजस्थान ला लाग कन् स . यहान आब बी भोयरी बोली ( भाया ) बोलस . वासिन कयी भोयर गुजरात , राजस्थान , पंजाब म गया . वासिन मालवा - बुंदेलखंड म आया . आन् आब मध्यप्रदेस , महाराष्ट्र , छत्तिसगढ म रव्हस .
येनऽ हिसाब कन सिन्धु नदी आमारी पह्यली माय स .
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
हमारी सभ्यता के उदय की शानदार जानकारी
ReplyDeleteधन्यवाद जी
DeleteKhub mahatvapurn jankari.
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteलय साजरो
ReplyDeleteधन्यवाद जी
Deleteवाह।।। खुप साजरो लिखान करेस ।।
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