Sunday, January 3, 2021

सागरगोटा ( भोयरी कविता ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

सागरगोटा
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

टुटी बिल्लोर बंगडी
डाव केता खरा खोटा
भोयी कसी पाचखडी
खेल म सागरगोटा ।१।

झेले खडा बराबर
आये मुंडा पर झोटा
सरकाया सरसर
खलऽ का सागरगोटा ।२।

बिन पयसा को खेल
भरे सुख कन वटा
डोरा हात को जी मेल
मुठ म सागरगोटा ।३।

घाडो खडा को हरिक
सले नसीब म काटा
असो बाहाडे कुरुप
उबज्या सागरगोटा ।४।

पाटी लेखन पकडी
कऱ्या सीधा उरफाटा
सुटी बाट आडीमोडी
हवा म सागरगोटा ।५।

बाजे टिक टिक घडी
भागे संग नाना मोठा
आब तरसस धडी
उप्या जी सागरगोटा ।६।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर 

8 comments:

  1. बचपन को बेटियों को खेल
    अद्भुत

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    1. धन्यवाद नन्दलाल जी

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  2. सागरगोटा...खुप सुंदर रचना

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