Thursday, December 31, 2020

क्यालेंडर. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

क्यालेंडर

Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

झुंझुरका च जाग आयी...
अंधारा क पाठ पर मध्दम मध्दम लाल बयंगनी उजिड बह्य रह्यतो...
कारो निरो अगास साफ होतो .
बाहाडत गये लाल सेंदरी उजारो...
ठंडी ठंडी हवा सूटीती .... सी बी लागत होती .
आब चांगलो च दिन फाकेतो..
अगास म बगरा की तिरकोनी रांग जाय रहीती सूर्व्या कितऽ..
सिट्टी बाजवत बाजवत राघू को झुंड बी झरकन् उड्यो .
आंगना म पिवरऽ सोना को उजिड अन् लाल पिवरी आगटी..
वोक भवताल चादर घोंगडा वोढकन् सेक रह्याता दूय चार झना..
कोनी क हात म दातून त कोनी बिडी पे रह्याता ... बगल म च खाली टम्बरेल बी...
गतसाल की बातचीत आगटी क धुपट संग वरतऽ वरतऽ जाय रह्यीती .
फड फड ऽऽ फड फड ऽऽ फड फड ऽऽ..
पुरानऽ क्यालेंडर का पानना फडफड्या..
क्यालेंडर क खलतऽ का मुड्या दूय कोन .... कयी थोडाबूत फाट्या पान..
तारीख क डब्बा म लाल निरा निस्यानना आन् कोनटा कानटा म बारीक बारीक लिखान.. 
कहान कहान लेनदेन का  नाना मोठा आकडा..
दूरीन तारीख का आकडा त दिसस पर बाकी सबन गिचमिड गिचमिड..
क्यालेंडर ला काढे आन् डिसेंबर को पानो पलटाये...
राजा भोज को झलारतो फटु आघ आये..
पान पर को धुड्डो झाडे आन् वोला खाट प धरे..
रब्बड म गुंडारकन धरेतो ती नवो क्यालेंडर काढे आन् खिरा म हिलगाये..
राजा भोज को नवो कोरो रूप...काठा कोनटा येकदम नवा ! 
हलको हलको कागद को सुगंध...
येकटक देख्यो... दूय आसू डोरामिन गाल प बह्या...
गतसाल को दुख दरद बह्य गयो वोमऽ ...
आपरंग च दूय हात जुड्या नमस्कार साठी..
साफ भया डोरा आन् डोकसा म 
आब नवी उम्मीद.... नवऽ साल की !

रचना : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर 

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