हे राजा भोज
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हे राजा भोज कुल शिरोमणी
हम पूजते बारं बार है ।धृ।
धधक धधक धगगती
वह दहकती अंगार है
धडक धडक धडकते
वह दिल की पुकार है ।१।
डम डम डम डमरू से
आकाश गुॅंजता ओंकार है
पावन तू मनभावन तू
करता सपने साकार है ।२।
घुमड घुमड बादलों में
बिजली का रूप साकार है
अन्याय पर ही जो बरसे
ऐसा न्याय का तू वार है ।३।
दुश्मनों को मार मार भगाये
ऐसी तिलिस्मी तलवार है
चले कलम सरस्वती की
महाज्ञानी अपरम्पार है ।४।
गरजते सागर से लडे
वो साहस की पतवार है
राह आपने जो दिखलाई
हमें उसी पे एतबार है ।५।
रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
खूब साजरी काव्य रचना.
ReplyDeleteजय श्री राजा भोज
ReplyDeleteजय राजा भोज..🙏
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