अजब गजब - ४३ : भुयारेस्वर सिव मंदिर , वाघोडा
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
महाराष्ट्र म वर्धा जिला क कारंजा तहसील म कारंजा - भारसिंगी सडक प कारंजा पासिन ४ कि.मी. दूर जेवनऽ हाथ प वाघोडा गाव स . गाव को नाव स वाघोडा त बाघ को कोनतो न् कोनतो नातो होयेन च ! यहान स बाघ गुफा ! वाघोडा गाव पहाडी क पायथा क काठ काठ कन बसेस . गाव त २००/३०० बरस पह्यले च आबाद भयो पर इ स्थान पुरातन स .
१०/१२/२० तारीख ला बस्तरवार दिनऽ मु आन् मनोज भाऊ गोरे वाघोडा ला गया . वहान सिरी रामजी कामडी , तुकाराम जी कामडी , दत्तुजी कामडी संग बातचीत करी . वाघोडा म कामडी कुर का कुटुंब जास्त स . सिरी रामजी कामडी न भुयारेस्वर सिव मंदिर की महिमा सांगी . वून क घर सिन च आमी गुफा देखन साठी गया .
वाघोडा गाव म बराबर दकसिन दिस्या म पहाडी दिसस . पानी टंकी क आघऽ सिवटेकडी प बाघ गुफा स . यहान च महादेव मुखी भुयारेस्वर सिव मंदिर स .
१ . इतिहास : * भुयारेस्वर सिव मंदिर वाली पहाडी कप्पी मुरुम की स . तेकन यहान क भुयार म खसखुस चालूच रव्हस . पह्यलऽ येनऽ भुयार म सिवबाबा , योगीबाबा रवत होता . उन क संग च कुतराना बी होता . बाबा हरदम सिवजाप करत होता . गाव सिवार म सरप निकरे त वुई सरप ला मारन साठी मनाई करता . बाबा सरप ला पकडकन् भुयार जवर लायकन सोडत होता . महासिवरातरी ला भुयार क आघऽ गड्डो खंदकन् वोमऽ इंधन बारत होता . सकारी गड्डाभर लाल लाल निवाच निवा ! बाबाजी आन् भगत लोगना वोपरीन चालत जात होता पर कोनी का च पाय ना लासत होता ना बरत होता !
* पह्यलऽ भुयार को मुंडो निरुंद च होतो . वोमीन पेट क भार सोय कन च अंदर जाता आवत होतो . मंझार म उभऽ रवन जोगती जागा होती . लोगना न भुयार ला चवडी करन साठी खंदे . खंदन क बेरा बयील क हंबऱ्या सरखो जोर को आवाज आये . सबन येकदम दांदर गया . खलतऽ उजिड म देख्ये त वहान नंदी की मूरती होती . नंदी ला सब्बल लागीती तेकन वू हंबरेतो . भुयार म नंदी की पास्यानी मूरती सापडी , वको लोगना ला नवल वाटे . बाद मऽ झोक झोक्कन खंदे त पिंड ( सिवलिंग ) बी सापडी . वून की वहान च स्थापना करी . खुदाई म अनखिन मूरतीना सापडी .
* इ.स . १९९४/९५ म यहान पारडसिंगा का ठाकरे गुरजी आयाता . वुई दिन भर भुयार म थांब्या , दरस्यन लेये आन् गाव म आया . वून न सांगे क भुयारेस्वर सिव जी जागरूत स .
* भुयारेस्वर सिव मंदिर म भाकरे महाराज आन् कयकाडे महाराज कयी बेरा आयाता .
२. स्थान आन् रचना : * सिवटेकडी परीन १०/१५ गाव को सिवार दिसस . आबऽ भुयार को मुंडो चवडो करेस आन् लोखंडी गेट बी लगायेस. भुयार की रचना अजब गजब च स . महादेव मुखी भुयार म गया बाद मंझार म ९ x ९ फिट की ५ फिट उच्ची जागा स . इ अचंबो यहान च खतम नी होत . यासीन चार दिस्या म चार भुयार स . आघ की महादेव मुखी भुयार ३० फिट लंबी , पसचिम की ४० फिट लंबी स . पसचिम वाली भुयार को मुंडो भीर कितऽ स . सूर्व्यमुखी भुयार की लंबाई कोनी ला च ठाव नहाय आन् आबऽ बांधकाम करे तब वोला बुजाई . सिवलिंग क पासऽ की दकसिन मुखी भुयार को अंत बी कोनी ला च ठाव नहाय . वोम कोनी जान की बी हिम्मत नी करत . मंझार म सिव स्यंकर भोल्यानाथ आन् वोकऽ चारी बाजू म भुयार की या अद्भूत जागा , म्हरऽ जानकारी म येकली च स . भुयार पास्यान म रव्हस . पर या भुयार मुरुम म स . भुयार २/३ फिट चवडी आन् ३/४ फिट उच्ची स . भुयार क पसचिम की भीर बी कोनऽ खंदी .... कोनऽ बांधी या बात बी कोनी ला च ठाव नहाय .
३. मान्यता आन् चमत्कार : * सिवलिंग क पासऽ वाली भुयार म मोठो भुजंग रव्हस , आन् कुचित च भाग्यवान ला दरस्यन देस , असी मान्यता स .
* कोनी ला जर ताप , आसुक आये होयेन आन् वू तीन डाव आयो होयेन त् भुयारेस्वर सिव मंदिर म पूंजापाती कऱ्या बाद वू निकर जास ... आराम पडस , असी मान्यता स .
* येक डाव भुयारेस्वर सिव मंदिर जवर स्याळा म का दुय चार पोटुना खेल रह्याता . वून ला अचानक ' डम डमऽ... डम डमऽ.. ' असो डमरू को आन् नाचन को आवाज भुयार मीन आयकन् ला आये . डमरू जोर जोर कन बाज रह्येतो . वून न भुयार क मुंडा मीन अंदर देखे त का नवल ! वून क मुंडा मीन आवाज निकरनो बंद भयो . डोरा उघडा का उघडा च रह्या . भुयार म साकस्यात स्यंकर भोल्यानाथ जी तांडव नाच कर रह्याता . ' डम डमऽ... डम डमऽ....डमडम डमऽऽ ...' पोटुना भेबाऱ्या आन् धुम घर कितऽ भाग्या . नाना पोटुना खोटा थोडा च बोलेन ? पोटुना ला खरो च सिव भगवान को दरस्यन भये , असी मान्यता स .
* सिरी रामजी कामडी क खेत म बोर करन को काम चालू होतो . निरो पास्यान ढुड्डो उड रह्येतो . सिरी रामजी येक झाड खलऽ सावली म नीज गया . वून क आघ पांढरऽ झक कपडा म कोनी स्यक्ति न दरस्यन देये आन् कह्ये क् चिंता की बात नहाय ... ३०० फिट प पानी च पानी स , आन् येतरो कह्यकन वूई गायब भया . सिरी रामजी बोर कितऽ गया . चारी कितऽ पानी च पानी ! वून बोर वाला ला पुसे क , केतरो फिट भयो ? बोर वाला न सांगे क २९४ फिट . वून न कह्ये क अनखिन ३०० फिट पावतर खंदो , त बोर वालो नट गयो . बोल्यो क पानी आटप च नी रह्ये , कसो खंदू ? वून की सरधा स क इ काम भुयारेस्वर सिवजी को च होय .
* येनऽ भुयार म पुरातन काल पासिन योगी - जोगी , रिसी मुनी न जप तप करेस , असी मान्यता स .
४. उत्सव : * भुयारेस्वर सिव मंदिर म हर सनवार आन् सोम्मार ला पूंजापाती न आरती होस . या पूंजा कारंजा क खेनवार जी किथिन रव्हस .
* हर सन तिवार ला भुयारेस्वर सिवजी की पूंजा करस .
* गाव म कोनतो बी काज होयेन त् वोकी पतरिका पह्यले भुयारेस्वर सिव जी ला अरपन कर कन आसिरवाद लेस .
* महासिवरातरी ला यहान मोठी यातरा भरस . ७ दिन को भागवत सप्ता म ५००० परस बी जास्त लोगना आवस .
# आबऽ भुयार क आघऽ मंगलभवन को काम चालू स . काम पुरो भया बास्त बिह्या स्यादी आन् दुसरऽ धारमिक , सामाजिक काम काज साठी इ भवन काम म आयेन , असो कमेटी क लोगना न सांगेस .
जय भुयारेस्वर सिव जी की .....
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
हर हर महादेव
ReplyDeleteधन्यवाद जी
Deleteधन्यवाद सर
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