अजब गजब - ३७ : महारानी कर्नावती
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
उत्तराखंड क गढवाल म कयी साल परमार राज होतो . गढवाल क महाराजा महिपाल सिंग की महारानी कर्नावती ला " नाक काटी रानी " क नाव कन् इतिहास वरखस . नाव त अजब गजब स च पन् महारानी कर्नावती को काम आन् बहादुरी बी अजब गजब च स .
गढवाल राज ला मुगल कब बी जित नी सक्या . गढवाल म बी सिरी नगर स . इ.स. १६६२ म महाराजा महिपाल सिंग न गढवाल राज की राजधानी देवालगढ परीन सिरीनगर ला ल्यायी .
महाराजा महिपाल सिंग आन् महारानी कर्नावती मोठा बाह्यदूर होता .
* १४ फरवरी १६२८ म स्याहजहान आगरा क राजगादी पर बसे . वोकऽ ताजपोसी प देसभर क राजा लोगना न आगरा ला अहिर पठाये आन् खुद बी वहान गया . पर गढवाल क राजा न ना अहिर पठाये आन् ना खुद गया . स्याहजहान ला येको लय राग आये . राज्या क चमच्या लोगना न सांगे क , गढवाल म सोना की खदानना स आन् महिपाल सिंग राजा जवर खूब धनसंपद स .
स्याहजहान न गढवाल पर लय डाव हमलो करे पर गढवाल ला वू जीत नी सके .
* मंझार म च इ.स. १६३१ ला कुमांऊ क लढाई म महाराजा महिपाल सिंग घायल भया , आन् वोम च वून को जीव गयो . वून क सात साल क पृथ्वीपति स्याह नाव क पोरग्या ला राजगादी पर बसाडे . नानऽ पोरग्या क कारन राजपाट की जबाबदारी महारानी कर्नावती प आयी . वून क संगऽ गढवाली फऊज को सेनापती लोदी रिखोला , माधोसिंग , बनवारीदास तंवर , बेग असा भरोसा वाला वीर होता .
* महाराजा महिपाल सिंग क मरन क बाद स्याहजहान नि इ.स. १६४० म वापिस गढवाल प हमलो करे . वून क सेनापती नजाबत खान संग ३०००० घोडसवार आन् पयदल फऊज होती . महारानी कर्नावती न वून ला आपलऽ राज म त घुसन दे पर चंडीघाटी म ,आबऽ जहान लकसुमन झुलो स , वहान वोकऽ फऊज ला दुय आंगऽ किथिन घेऱ्यो . रसद बंद भयी . नजाबत खान की फऊज भूकी मरन ला लागी . हार मानकन् नजाबत खान न समझोता साठी इतल्लो धाडे , जेला महारानी कर्नावती न ततकाल ठुकराये . महारानी कर्नावती न येक अजब समझोतो पठाये . जेला जितो आगरा ला जान को होयेन , वोला आपली नाक काटकन् जानो लागेन ! इ इतल्लो महारानी कर्नावती उ आगरा ला पठाये , आन् कह्ये क वा सबन को गरो बी काट सकस !
स्यहाजहान सरमिंदो भये , अपमानित भये आन् वोला राग बी लय आये . पर वोकऽ जवर कोनतो च उपाव नी होतो .
* महारानी कर्नावती न पह्यले त नजाबत खान की नाक आपलऽ तलवार कन् काटी , आन् बाद म सबन मुगल फऊज की नाक काटकन् वून ला वापिस पठाये . तब पासिन महारानी कर्नावती को नाव " नाक काटी रानी " पड्ये .
* असोच नाक काटन को कारनामो महारानी कर्नावती न मुगल हमलावर अरीज खान आन् वोकऽ फऊज संग करे . येकऽ बाद कोनी की बी हिम्मत नी भयी गढवाल कितऽ देखन की !
* महारानी कर्नावती न च राजपुर नहर बनवायो . इ नहर रिपसना नदी पासिन सुरू होस आन् देहरादून पावतर पानी पोहोचवस .
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
खुब साजरी माहिती
ReplyDeleteधन्यवाद मनोज जी
Deleteखूब साजरी माहिती.
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteबहुत ही अच्छी इतिहासिक जानकारी
ReplyDeleteजय हो रानी कर्णावती
इतिहास की छुपाई हुई जानकारियों को आप जैसे लेखक आज वास्तविकता में सभी को उपलब्ध करा रहे हैं बहुत ही अभिनंदन है
धन्यवाद सर
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