Thursday, October 15, 2020

अजब गजब - १४ : देसमुख कुरकथा. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - १४ : देसमुख ( देशमुख ) कुर कथा

Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

* आडनाव की परथा ११ वी सदी पासिन चालू भयी आन् पेसवा क राज म बाहाडी , असी मान्यता स .
* देसमुख ( देशमुख ) इ उपनाम  ( कुर ) महाराष्ट्र , मध्यप्रदेश , तेलंगणा , कर्नाटक , छत्तिसगढ आदि राज्य म दिसस . 
* देसमुख आन् देसमुखी इ वतन हजारों बरस पासिन परंपरागत राज येवस्था को येक अव्वल दरजा को अधिकार आन् जबाबदारी को पद होतो . देसमुख इ वून क  ' महाल ' ( जिला ) ,  ' परगना ' ( प्रांत ) नाव क महसूल ( revenue ) विभाग क मुखिया क रूप म कामकाज देखत होता . 
* देसमुख घराना क मोठऽ पोरग्याला च देसमुखी भेटत होती . देसमुख / देसमुखी वंसानुगत येवस्था होती . येकच खानदान म देसमुखी चलत होती . 
* लढाई क बेरा देसमुख न अमुक येतरी फऊज / सिपाई , घोडा राजा क सेवा म मदत साठी पठाया पाह्यजे , असो राजा संग करार होत होतो . 
* देसमुख क अधिकार म आवनी वालऽ इलाखा क हिसाब कन् देसमुख या पदवी , वतन  युरोपियन घरानास्याही क  " ड्युक " क बराबर होती . 
* देसमुख या पदवी / वतन या कोनऽ येक जात साठी नहीती .
* देसमुख यी आपलऽ इलाखा को सरकारच होतो . टैक्स की बसुली को हकदार देसमुख प पोलिस , कायदो कानून , बुनियादी सेवा ला बनायकन् राखन की जबाबदारी होती . 
* देसमुख क अधिकार ला रुसूम आन् भिकनो कोत होता . देसमुख क मदद साठी नाडकर्णी पद बन्यो . 
* महसूल ( tax ) म को २० % हिस्सो देसमुख को रव्हत होतो . 
* इंग्रज राज सप्या बास्त इ.स. १९५५ ला येक कायदो बने , जेकऽ अनुसार सबन वतनदारी च खतम भयी . देसमुख / देसमुखी गयी आन् देसमुख  उपनाम / आडनाव / कुर  रह्य गयो . 

# भोयर समाज मऽ का ' देसमुख ' को पुरानो वंस गुहिलौत , सिसोदिया स. महाराणा प्रताप जी येनच वंस का होता . इ वंस सूर्व्यवंसी स आन् गौतम गोत्र को स . देसमुख की कुलदेवी चण्डिका माय आन् कुलदेवता येकलिंग जी ( भगवान महादेव ) स.
देसमुख को झंडो लाल रंग को आन् वोपर सुनहरी सूर्व्यदेव को चिन्ह रव्हस . 

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर 

7 comments:

  1. देशमुख अन देशमुखी प्रथा तेक इतिहास की खूब साजरी जाणकारी।

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  2. देशमुख कुर की अच्छी जानकारी अभिनंदन भैय्या जी

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  3. सुन्दर माहीती ।।👌👌

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