सात आसरा को कथा गान - २
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
कमलावती तबलजी प
प्रेम भावना की पडी छाया
सूर ताल की त सपी माया
फुट्यो तबलो भयी जी हानी ।१०।
देव देवता नाराज भया
देव इंदर ला आयो राग
देयो सराप नरक भोग
लागी रोवन ला सात झनी ।११।
तबलजी लटलट कापे
भयी गलती उस्याप मांग्यो
बारा बरस नरक भोगो
वोक बाद नवी जिंदगानी ।१२।
भोग्यो नरक लेयो जी जलम
वांझोटी क पेट जीव सात
किडो गोबर को भोई उत्मात
तबलजी की धूरधानी ।१३।
विधवा क पेट तबलजी
लेयो जलम अवधूत
कह्ये गा झोटिंग कोनी भूत
जसी करनी उसी भरनी ।१४।
सात आसरा ला परनायी
सासू ससरा समझदार
सुखी संसार लाडा को प्यार
सात आसरा लयच गुनी ।१५।
इंदर देव कह्ये गंगा ला
नदी नाला को आटव पानी
अकाल लाये डोरा म पानी
गंगा मांगे सात सवासिनी ।१६।
बोली कमलावती आमी सात
गंगा जवर जाऊस आमी
नदी नाला म भरेन पानी
लोगना की नी होयेन हानी ।१७।
बने अवधूत धुरकरी
सात बहिन न पूंजा करी
जागी गंगा खुसी क मारी
आये पूर भरे पानीच पानी ।१८।
कोंडे गंगा न पातारलोक
सात बहिन ला कारावास
जांभुर खल भूत निजेस
लागे पाय ला ठंडो गा पानी ।१९।
( क्रमशः )
रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
वाह बहुत बढ़िया भैय्या जी
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Delete