जलम चित्तरकथा
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
जलम चित्तरकथा
जगरा की गा गवरी
सुख दुख स बहिन
संगऽ आवरी जावरी
परपंच को सफर
लागे हरद पिवरी
अस्तुरी आंगऽ कस्तुरी
लाजे बावरी नवरी
जगजेठी को गुताडो
जडी लगायी कवरी
आंग आंग वरबाडे
जात मानुस हावरी
जिंदगानी को जलसो
जिद पाय ला भवरी
गन गन वोकी चाल
मऱ्या परच निवरी
रोज रोज को दांगडो
रोज रोये गा चवरी
कसो हारपे मानुस
सोड आबऽ तू तवरी
रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
खूब साजरी रचना
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteवाह।।वाह।। खुप साजरी प्रस्तुति ।।
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteखूब साजरी
ReplyDeleteअभिनंदन
धन्यवाद सर
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