अजब गजब - १९ : धानी नगलाई
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
उत्तर परदेस क हरदोई जिला म स्याहाबाद तहसील म २३७ दाठ्ठा को " धानी नगला " नाव को गाव स .
* " धानी नगला " गाव ला धानी नगलाई , धानी नगलाई धारनगर , धानी नगलाई गढी असो बी नाव स .
* धानी नगलाई स्याहाबाद ( तहसील ) पासिन २६ कि.मी. आन् हरदोई ( जिला ) पासिन ६० कि.मी. दूर स .
१. इतिहास आन् मान्यता : * संवत् १३०५ म धारानगरी परिन आयकन् सिवपाल स्याह परमार राजा न उत्तरपरदेस क हरदोई , स्याहजहापूर , सीतापूर , लखनऊ क येनऽ भाग पर कब्जो कऱ्यो . वून न आपली जलमभूमी धारानगरी क आधार पर ' धारनगर ' बसाडे , गढी बनायी जेला आब " धानी नगलाई " कोस , असी मान्यता स . वून क संग हत्ती , घोडा सवार सेना , राय , भाट असा सबन होता , जी आज बी स . अलवर ( राजस्थान ) परिन वंसावली लेखक राय राव हरदोई ला आवस . आब वून क पोथी म परमार का यहान का २०० गाव दर्ज स , जिन को गोत्र वसिस्ठ स .
* येक डाव उज्जैन को राजो सिवपाल सहाय परमार सिकार साठी यहान आया . वोन बेरा यहान जंगल होतो . वून न दगड माती को येक वट्टो आन् सिवलिंग देख्यो . वून न भक्तिभाव कन् पूंजापाती करी आन् वहान धानी नगला गाव बसाडे , असी बी मान्यता सऽ .
वोन सिवलिंग ला ' सिध्देश्वर नाथ ' कोस . हरु हरु सिध्देश्वर नाथ लोगना म परसिध्द भये आन् लोगना बी पूंजा पाती करन साठी आवन ला लाग्या .
* कयी बरस पह्यले अलाहगंज का पंडित जगत परसाद बेमार पड्या . पंडित न सिध्देश्वर नाथ ला नवस बोले क , मु ठीक होय जावून त यहान मोठ्ठो देऊर बनाऊन . पंडित जगत परसाद ठीक भया . नवस क अनुसार वून क पोरग्यानऽ देऊर बनावन को काम सुरू करे .
देऊर बनावन क बेरा लोगना न सिवलिंग क जवर ९१० हाथ पावतर खोद्यो . वहान वून ला २२ गिराम का दुय सिक्का सापड्या . वोम को येक जानकारी काहाडन साठी दिल्ली ला पठाये . वासिन जवाब आये क येनऽ सिक्का पर धुरपदा ( द्रौपदी ) को नाव स .
* धानी नगलाई गाव क जवर हाडहा गाव म हिडिंब राकस रव्हत होतो . बनवास क बेरा भीम न वोला मारे आन् वकी बहिन हिडिम्बा संग बिह्या करे , असी मान्यता स .
२. उत्सव : सिरी सिध्देश्वर नाथ देऊर सरावन मह्यना म भागवत कथा रव्हस आन् मोठो मेलो भरस , जेमऽ लाखो लोगना आवस .
मह्यना भर भंडारो बी चालस . यहान क हनुमान मंदिर म सनवार आन् मंगरवार ला भगतना की भीड रव्हस .
# यहान रामताल , हनुमान मंदिर स . धुरपदा ( द्रौपदी ) की रसोई स , ज्यान मोठा ५ झाड स .
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
खूब साजरी रचना अभिनंदन
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteसमाज के फैलाव क्षेत्र की अद्भुत जानकारियां
ReplyDeleteसुन्दर प्रस्तुति सर 👌👌
ReplyDeleteधन्यवाद सर
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