अजब गजब - १४ : देसमुख ( देशमुख ) कुर कथा
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
* आडनाव की परथा ११ वी सदी पासिन चालू भयी आन् पेसवा क राज म बाहाडी , असी मान्यता स .
* देसमुख ( देशमुख ) इ उपनाम ( कुर ) महाराष्ट्र , मध्यप्रदेश , तेलंगणा , कर्नाटक , छत्तिसगढ आदि राज्य म दिसस .
* देसमुख आन् देसमुखी इ वतन हजारों बरस पासिन परंपरागत राज येवस्था को येक अव्वल दरजा को अधिकार आन् जबाबदारी को पद होतो . देसमुख इ वून क ' महाल ' ( जिला ) , ' परगना ' ( प्रांत ) नाव क महसूल ( revenue ) विभाग क मुखिया क रूप म कामकाज देखत होता .
* देसमुख घराना क मोठऽ पोरग्याला च देसमुखी भेटत होती . देसमुख / देसमुखी वंसानुगत येवस्था होती . येकच खानदान म देसमुखी चलत होती .
* लढाई क बेरा देसमुख न अमुक येतरी फऊज / सिपाई , घोडा राजा क सेवा म मदत साठी पठाया पाह्यजे , असो राजा संग करार होत होतो .
* देसमुख क अधिकार म आवनी वालऽ इलाखा क हिसाब कन् देसमुख या पदवी , वतन युरोपियन घरानास्याही क " ड्युक " क बराबर होती .
* देसमुख या पदवी / वतन या कोनऽ येक जात साठी नहीती .
* देसमुख यी आपलऽ इलाखा को सरकारच होतो . टैक्स की बसुली को हकदार देसमुख प पोलिस , कायदो कानून , बुनियादी सेवा ला बनायकन् राखन की जबाबदारी होती .
* देसमुख क अधिकार ला रुसूम आन् भिकनो कोत होता . देसमुख क मदद साठी नाडकर्णी पद बन्यो .
* महसूल ( tax ) म को २० % हिस्सो देसमुख को रव्हत होतो .
* इंग्रज राज सप्या बास्त इ.स. १९५५ ला येक कायदो बने , जेकऽ अनुसार सबन वतनदारी च खतम भयी . देसमुख / देसमुखी गयी आन् देसमुख उपनाम / आडनाव / कुर रह्य गयो .
# भोयर समाज मऽ का ' देसमुख ' को पुरानो वंस गुहिलौत , सिसोदिया स. महाराणा प्रताप जी येनच वंस का होता . इ वंस सूर्व्यवंसी स आन् गौतम गोत्र को स . देसमुख की कुलदेवी चण्डिका माय आन् कुलदेवता येकलिंग जी ( भगवान महादेव ) स.
देसमुख को झंडो लाल रंग को आन् वोपर सुनहरी सूर्व्यदेव को चिन्ह रव्हस .
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
Nice
ReplyDeleteदेशमुख अन देशमुखी प्रथा तेक इतिहास की खूब साजरी जाणकारी।
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteदेशमुख कुर की अच्छी जानकारी अभिनंदन भैय्या जी
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteसुन्दर माहीती ।।👌👌
ReplyDeleteधन्यवाद सर
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