भोयरी संस्कृति - १७ , भाग - ७ : दिवारी
भाऊबीज / भाईदूज
ॐ चंदनस्य महत्पुण्यं , पवित्रं पापनाशनम् ।
आपदां हरते नित्यम् , लक्ष्मीस्तिष्ठति सर्वदा ।।
भोयरी संस्कृति मऽ गायगोंधन क दुसरऽ दिन भाईदूज रव्हस . बहिन भाई क नाता ला मजबूती देन वालो इ तिवार .भाईदूज क दिन यमदेव गोलोक म आपली बहिन जमुना क घर गयतो . बहिन न वोला वोवारकन् पाहुनचार करे . तेकन भाईदूज ला ' यम द्वितीया ' कव्हस . भाईदूज ला च ' भ्रातृ द्वितीया ' बी कव्हस .
१ . मान्यता : जमुना ( यमराज की बहिन ) न यमराज ( भाई ) ला कह्ये क हर साल आज कऽ दिन तुमी म्हरऽ घर आवत जावो . आन् आज क दिन ज्या बी बहिन आपलऽ भाई ला वोवारेन वोला तुमारो भेव नही रहेन . यमराज जी न या बात मान ली आन् बचन मऽ बंध गया .
२ . रिवाज : भाऊबीज ला रात मऽ चंदर की कोर दिस्या पर बहिन भाई ला वोवारस . चऊक पुर कन् वोपर पिढो मांडस . पिढा पर कपडो डावस . बहिन भाई ला पिढा पर बसाड कन् वोका पायना धोस . पायना पुस कन् भाई ला अकसिद लगावस . आरती न् वोवार कन् भाई का पाय लागस . भाई ला मिठाई चारस . भाई आपलऽ आयपत नुसार बहिन ला वोवारनी डावस .
* भाई पर यमराज नजर नही पड्या पाह्यजे ... भाई की उमर लंबी रह्या पाह्यजे , असी बहिन की कामना रव्हस.... माया रव्हस .बहिन भाई साठी पाची पकवान को पाहुनचार करस .
* बहिन भाई क नाता ला समरपित इ तिवार भोयरी संस्कृति मऽ खास स .बहिन भाई को प्यार आन् सद्भावना को इ तिवार संदेस देस क सबन काम पकस्या नातो मोठो रव्हस .
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
👍👌
ReplyDeleteधन्यवाद मॅडम
Deleteमायबोली भोयरी मं भाऊबीज की खुब साजरी माहिती
ReplyDeleteधन्यवाद मनोज जी
Deleteभोयर समाज भाऊबीज कसी साजरी करस खूब साजरी माहिती
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteशुभ दीपावली
ReplyDeleteअपनी बोली भाषा में लिखा अभिनंदन
भाई दूज की अच्छी जानकारी अपनी बोली भाषा में लिखी है अभिनंदन भैया जी भाई दूज की शुभकामनाएं
ReplyDelete