भोयरी संस्कृति - २४ : बसंत पंचमी , चक्रवर्ती राजा भोज जयंती
Bhoyar people _ bhoyari culture
ऐं हीं श्रीं वाग्वादिनी सरस्वती देवी म म जिव्हायां ।
सर्व विद्यां देही दापय - दापय स्वाहा ।।
" चक्रवर्ती महान सम्राट राजा भोज की जय "
Language of article : bhoyari dialect _ भोयरी बोली
भोयरी संस्कृति मऽ माघ मह्यना क चांदनी ( उजरी ) पंचमी ला बसंत पंचमी को पर्व घर पर तसोच सामुहिक रूप मऽ धुमधामकन् मनावस .
* बसंत पंचमी ला च श्री पंचमी , सरस्वती जयंती , सरस्वती पूजा , चक्रवर्ती राजा भोज जयंती बी कोस.
* बसंत पंचमी को तिवार - सरस्वती देवी की पूंजा पश्चिमोत्तर चिन , नेपाल , मारीसस , सुरीनाम , फिजी म बी मनावस .
१. इतिहास आन् मान्यता : * रुगवेद मऽ माय सरोसती को वरनन स .
प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धिनामणित्रयवतु ।
* उपनिस्यद क कथा अनुसार , सिव भगवान क आग्या पर भगवान बरमा जी न या दुनिया रची . पर वून ला येमऽ थोडी कमी लाग रहीती . भगवान बरमा जी न भगवान बिस्नूदेव को आव्हान कऱ्यो . तब आदिस्यक्ती दुरगा देवी क तेज कन् बीना लेकन माय सरोसती परगट भयी आन् सबन जीव जंतू ला बानी ( वाचा ) भेटी . सारऽ भूलोक पर आवाज - नाद की निरमिती भयी . .... चेतना आयी . * माय सरोसती ला वागीश्वरी , भगवती , शारदा , वीणावादिनि , वाग्देवी असा कयी नाम कन् पुंजस.
* पुरान कऽ अनुसार भगवान सिरीकिस्न क वरदान कन् बसंत पंचमी ला माय सरोसती की पूंजा -
आराधना होस .
* बसंत पंचमी क दिन च भगवान सिरी राम स्यबरी माय ( दंडकारण्य ) क घर गयाता .
* पृथ्वीराज चव्हाण राजा न बसंत पंचमी क दिन च आत्मबलिदान कऱ्योतो .
* चक्रवर्ती राजा भोज जी को जलम बसंत पंचमी ला च भयोतो . बसंत पंचमी ला वूई आपलऽ राज म
मोठो पर्व मनावत होता . इ पर्व ४० दिन चालत होतो . भोज राजो माय सरोसती का परम भगत होता. भोज राजा क बखत म कवत होता , :
अद्य धारा सदाधारा सदालम्बा सरस्वती ।
पण्डिता मण्डिता: सर्वे भोजराजे भुवी स्थिते ।।
जब भोज राजा को स्वर्गवास भयो , तब कहे गयो अद्य धारा निराधारा निरालम्बा सरस्वती । पण्डीता: खण्डिता: सर्वे भोजराजे दीवं गते ।।
कुलभूषण चक्रवर्ती राजा भोज लोककथा ना को अनमोल नायक स. जसो वून न आपलो राज बाहाडाये , देस को बचाव करकन् सारी सुबिधा आपलऽ राज म लायी , उसीच तलवार क संग ग्यान की कलम बी चलाई . वुन न धरम , खगोल विद्या , कला , कोस रचना , भवन निरमान , काव्य , दवाई स्यास्तर असा कयी विस्यय पर ८४ ग्रंथ लिख्याता . आबऽ वोम का सिरफ २१ बाच्यास . राजधानी धार ला वून न ग्यान को ठिकानो बनायो .
२. रिवाज : रुतराज बसंत म आवनी वालऽ ' बसंत पंचमी ' तिवार ला सारो समाज सामुहिक ढंगकन् मनावस.
महाराष्ट्र , मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ , राजस्थान , हरयाना , बिहार , गुजरात आन पुरऽ देस म बसंत पंचमी ला चक्रवर्ती राजा भोज जयंती की
धुमधाम रव्हस . झुंझुरकाच घर , आवार , रस्ता झाडकन् सडोसारवन करस . आंगना म , रस्ता पर चऊक पुरस . गाव गाव म , समाज संगठन म येन तिवार को बेगरोच जोस रव्हस . पह्यले घर म माय सरोसती नऽ राजा भोज की पूंजा करस . सकार पासिनच राजा भोज , माय सरोसती , गढकालिका माता क मोठ मोठऽ चितरंग संग गाज्या बाज्या कन्
मिरवनूक काहाडस . या मिरवनूक समाज भवन , नही त् मोठ मयदान मऽ आवस . मानवाईक लोगना राजाभोज की जीवनी , उपदेस सांगस . सरोसती वंदना , माय गढकालिका , राजा भोज की आरती होस . समाज संगठन महापरसाद को बी आयोजन करस . येन सामुहिक उत्सव म रक्तदान , डाकटर किथिन तब्येत की तपासनी , आन् झालपड्या नाटक - गाना को बी कार्यक्रम रव्हस .
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
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