( bhoyari dialect )( bhoyar people - bhoyari culture ) भोयरी संस्कृति , भाग - १९ : नागदिवा
शुक्ला मार्गशिरे पुण्या श्रावणे या च पंचमी ।
स्नानदानैर्बहुफला नागलोक प्रदायिनी ।।
भोयरी संस्कृति मऽ नागदिवा को तिवार मारगसिर्स ( अगहन ) मह्यना कऽ चांदनी ( उजरी ) पंचमी पासिन मारगसिर्स पुनव ( अगहन पुनव ) पावतर मनावन को रिवाज सऽ .
* महाराष्ट्र क कयी भाग म मारगसिर्स ( अगहन ) मह्यना कऽ चांदनी ( उजरी ) पंचमी ला च नागदिवारी मनावस आन् कुलदेवता की पूंजा करस .
* येनऽ पंचमी ला च नागपूंजा पंचमी , विवाह पंचमी , बांके बिहारी परगट पंचमी यी बी नाव स .
१ . दिनविस्येस : मारगसिर्स ( अगहन ) मह्यना मऽ भगवान सिरी राम आन् सीता देवी को ब्याह येनच पंचमी ला भयेतो . सीता देवी को ' स्वयंवर ' राजा जनक न जेन दिन राखेतो वू दिन होतो मारगसिर्स ( अगहन ) मह्यना की चांदनी ( उजरी ) पंचमी ! भगवान राम - सीता देवी क ब्याह संगच सिरी लछमन - देवी उरमिला , सिरी भरत - देवी मान्डवी , सिरी स्यतरुघन - देवी सृतकिरती को बी ब्याह भयो .
२. मान्यता : येनऽ पंचमी ला नागपूंजा बी रव्हस . स्कन्द पुरान कऽ अनुसार येनऽ पंचमी ला उपास धरकन् नाग पूंजा करनी वाला की कयी मनोकामना , इच्छा पुरी होस . याच पूंजा मनजे ' नागदिवा ' मराठी म नागदिवा ला नागदिवे , नागदिवाळी बी कोस .
३. पूंजा : भोयरी संस्कृति मऽ जरी नागदिवा को तिवार पंचमी पासिन मारगसिर्स ( अगहन ) पुनव पावतर मनावस तरी येनऽ पूंजा ला बस्तरवार आन् मंगरवार वर्जिक स . इ दुय दिन सोडकन् बाकी दिन नागदिवा की पूंजा करता आवस .
# नागदिवा क पूंजा साठी पाच , सात ,नव असा विस्यम संख्या म दिवा बनावस .
# नागदिवा पीठ , कनिक , पुरन का बनावस . यी दिवाना भाप म उकडस . भाप की सुबिधा नही जमी त् भात म च सिजवस .
# नागदिवा क दिन कढय बी करस . ( सिरो )
# चवरी आघऽ चऊक पुरकन् वोपर खारी नही त् नवो कपडो धरस . वोपर आरती थाटी मांडस . वोनऽ आरती म जी दिवाना बनायता , वूई धरस . येनऽ दिवा को आकार दिवनाल सरिखो रव्हस . वोमऽ तूप आन् बात डावस आन् दिवा उजरस . बगल म कढय बी मांडस . नागदिवा क आरती ला आप आपलऽ हिसाबकन् साजरी सजवस . आघऽ आन् कढय म उदबत्ती लगावस . नागदिवा आन् कढय की हरद - कुकू , अकसिद , बेल - फुल कन् पूंजा करस . रार - गुगुर बारस .
# पूंजा करनी वाला महादेव मुखऽ रह्यकन् पूंजा करस .
# कोनी कोनी का नागदिवा नवस का बी रव्हस .
# नागदिवा - कढय की पूंजा भया बाद आरती करस.
# पीठ , कनिक , पुरन कन् बनाया नागदिवा को परसाद बनावस आन् गाय- बासरु ला निवद देस .
( सहयोग : सौ. पार्वतीबाई महादेवराव देशमुख )
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर .
नागदीवा सण की खूब साजरी माहिती दीस धन्यवाद भोयर पवार समाज.
ReplyDeleteधन्यवाद सर
DeleteGood information about Nagdiva Sureshji Deshmukh Saheb.
ReplyDeleteThank you sir
Deleteसुरेख माहिती
ReplyDeleteधन्यवाद निलेश दा
Deleteभोयरी संस्कृती म नागदिवा त्योहार की खुब साजरी माहिती
ReplyDeleteभोयरी संस्कृती म नागदिवा त्योहार की खुब साजरी माहिती
ReplyDeleteधन्यवाद मनोज जी
Deleteसुरेख माहिती सुरेशभाऊ।।
ReplyDeleteतुमच्या या लिखाणामुळे आम्हाला खूप माहिती मिळते।
तुमचे हे कार्य असेच दिवसागनिक वृद्धिंगत व्हावे हीच सद्धीच्या।।
आपलो लेख अउर माताजी का ग्यान दोनो महान
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteभोयरी संस्कृतीला जिवंत राखणको काम आपण कर रह्यास...
ReplyDeleteसमाज बांधवनाला, नविन पीढीला जागो करनको शुभ काम आपल हातसीन होय रयस...धन्यवाद
धन्यवाद नागेश सर
Deletevery nice Kaka....we are inspired to you.
ReplyDeleteIt's really good information about nagdiva festival in detail.
DeleteThank you
DeleteIt's really good information about nagdiva festival in detail.
ReplyDeleteThank you
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