चक्रवर्ती राजा भोज जी की आरती
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
Bhoyar people _ भोयर लोग
जय जय जय , राजा भोज नृपति
हे कुलनंदन , वंदन अधिपति ।। धृ.।।
लेयो अवतार , उज्जयनी नगर
कुर परमार , महाकाल नजर
बसंत पंचमी , जलम दिन तिथि
दुनिया म भयी , मालवा की किरती ।१।
माय सावितरी , पिता सिन्धुल राज्यो
नानऽ पन म च , सिंगासन बिराज्यो
धार राजधानी , चम् चम् करती
मालवांचल की , पावन भयी माती ।२।
माय सरोसती , ग्यान गुन सागर
भयी परसन्न , भरी ग्यान की घागर
भेटे वरदान , संगऽ बात करती
ग्यान उजियारो , फैले सारऽ धरती ।३।
पोथी चवऱ्यास्सी , अति साजरी लिखी
सपी तिरसठ , करे मन ला दुखी
कुपातर आमी , अनपढ कुमति
किरपा करजे , हे भोज महिपति ।४।
चार ठाव राज , तुमी न फयलाये
भागे दुसमन , तलवार चलाये
न्याव ग्यान राज , भोजदेव किरती
मन म बसीस , तुमारीच मूरती ।५।
रस्ता क तुमारऽ , करू अनुकरन
बाट दिखाडजे , सावितरी नंदन
कुर देसमुख , सुरेस रची आरती
भोयरी बोली म , गाऊ तोरी किरती ।६।
रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
👌👍👋 चक्रवर्ती महाराज राजाभोज की जय
ReplyDeleteजय मायबोली भोयरी
Jai raja bhoj
Deleteवा राजा भोज की किरत को सुंदर बखान करेस, जय राजा भोज
ReplyDeleteधन्यवाद सर
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