Sunday, July 19, 2020

भोयरी संस्कृति - १५ : माडी

भोयरी संस्कृति - १५ : माडी

भोयरी संस्कृति मऽ आसिन पुनव ला माडी पर्व मनावस . कास्तकार आन् स्यहरी लोगना बी माडी ला धुमधामकन् मनावस . माडी कऽ बखत खरीप की फसल घर मऽ आयी रव्हस . येक परकार कन् घर मऽ आये अनाज की पूंजा करन को इ दिन . 
भोयरी संस्कृति मऽ दसरा पासिनच माडी को माहोल तयार होस . पोटुबाटुना दसरा कऽ दुसरऽ दिन पासिन कबड्डी खेलन ला लागस . दसरा पासिन पाचवो दिन माडी को ! येनऽ हफ्ताभर हासी - खुसी , खेलन को माहोल रव्हस .
माडी कऽ दिन चंदर सोरा कला कन् पुरो आन् पुरथी ( पृथ्वी ) कऽ येकदम जवर रव्हस .
माडी पुनव स्यरद रितू मऽ आवस तेकन स्यरद पुनव ! माडीला च स्यरद पुनव , कोजागिरी पुनव , रास पुनव , मानिकेथारी ( मोती तयार करनी वाली ) पुनव , कुमार पुनव , लोख्खी पूंजा कव्हस . 

१ . इतिहास :  * माडी पुनव को पर्व इ पुरानो लोक उत्सव सऽ . वात्सायन नऽ येला " कौमुदी जागर "  आन् वामन पुरान नऽ " दीपदान जागर " कह्येस . येनऽ दिन बली राजा की पूंजा करनो , असो वामन पुरान मऽ सांगेस . 
* माडी पुनव ला चंदरलोक मिन सिरी लक्षुमी देवी धरतीलोक पर आवस , असी धारना सऽ . पुरान कऽ अनुसार समुद्र मंथन मिन माडी कऽ लक्षुमी देवी परगट भयी , तेकन माडी ला लक्षुमी देवी को जलमदिन मानस .
* भगवान सिरीकिस्न सोरा कला को अवतार ! द्वापार जुग मऽ बिंदराबन ( वृंदावन ) मऽ भगवान सिरीकिस्न नऽ माडी कऽ रात गोपिका संगऽ महारासलीला रचायती . 

२ . माडी का अनोखा रूप :  
* माडी ला गुजरात मऽ रास आन् गरबा खेलकन्  ' स्यरद पुनम ' कऽ नाव कन् मनावस .
* मिथिला मऽ माडी ला  ' कोजागरहा ' या पूंजा करस .
* हिमाचल परदेस मऽ माडी कऽ निमितकन् जत्रा भरस .
* राजस्थान मऽ माडी ला बाईलोग पांढरा कपडा पेहेरकन् चांदी का अलंकार घालस . 
* हरयाना मऽ माडी ला खीर बनायकन् आंगना मऽ धरस आन् सकारी वोको परसाद लेस .
* ओडिसा मऽ माडी ला कुमार पुनव कव्हस . येनऽ दिन गजलक्षुमी देवी की पूंजा करस .
* बंगाल मऽ माडी ला लोख्खी पूंजा कव्हस . स्यंख आन् कमल कऽ फुल संग सिरीलक्षुमीनारायन की पूंजा करस . 
* माडी कऽ दिन दमा , अस्थमा की दवाई खीर मऽ डायकन् देस . 

३ . भुलाबाई :  भुलाबाई मनजे पाराबती देवी . येक कथा कऽ अनुसार सारीपाट मऽ भोल्यानाथ पारबती संग हार जास , आन् वूई रुसकन् कयलास पर चली जास . पारबती वून ला मनायकन् वापिस ल्यावस . महादेव पारबती कऽ रूप ला भुल्यो तेकन ' भुलोबा - भूलोजी राव . आन् आदिमाय पारबती नऽ वून ला भुलाये तेकन पारबती ला  ' भुलाबाई ' कोस . महाराष्ट्र मऽ अकोला जिला कऽ अकोट ला येकमातर  ' भुलजा - भुलाई ' को ३०० बरस पुरानो मंदिर सऽ .
पह्यलऽ भोयर समाज मऽ माडी को पर्व  मह्यना भर चलत होतो . बाद मऽ पाच दिन पर आये . आन् आब येक दिन पर ! 
आंगना मऽ भुलाई की पूंजा मांडस . चऊक पुरस . बिडा कऽ पान पर सुपारी को गनपति मांडस . हरद कुकू , अकसिद , फुल कन् पूंजा करस. दिवो , उदबत्ती लगावस . भुलाबाई का लोकगीत गायकन् बाईलोगना आपलो सुखदुख वोमऽ मांडस . भुलाबाई माहेरवासीन ! सासर की खिल्ली आन् माहेर को गुनगान मज्याक कऽ रूप मऽ येनऽ लोकगीत मऽ दिसस . माहेरवासीन आपलो सासुरवास येनऽ लोकगीत मिन मांडस . हासी - मज्याक बी खूब होस .
* अडकी मऽ जाऊ , खिडकी मऽ जाऊ 
खिडकी मऽ होती घागर..
भुलोजी ला पोटु भयो , नाव धरो सागर । 
अडकी मऽ जाऊ , खिडकी मऽ जाऊ
खिडकी मऽ होती दोरी...
भुलोजी ला पोटी भयी , नाव धरो गवरी ।.......

* ..आब तरी जान देव सासूबाई , बावाजी आये लिजान ला.. लिजान ला 
कारला को बी लगाव वो बू बाई , मंग जा आपलऽ माहेर ला.. माहेर ला 
कारला को बी लगाये सासूबाई , आब तरी जान देव माहेर ला... माहेर ला
कारला को बेल निकरन दे बू बाई , मंग जा आपलऽ माहेर ला ... माहेर ला
कारला को बेल निकऱ्यो सासूबाई , आब तरी जान देव माहेर ला... माहेर ला
कारला ला फुल लागन दे बू बाई , मंग जा आपलऽ माहेर ला ... माहेर ला .........
मला का पुसस बरीच दिसस , पूस आपलऽ ससरा ला... ससरा ला
मला का पुसस बरीच दिसस , पूस आपलऽ लाडा ला... लाडा ला
मालक.. मालक..
दादो आयेस लिजानला , जाऊ काजी माहेर ला.. माहेर ला
काडी हात मऽ मारी पाठ मऽ , तोला मोठो माहेर आठवस... माहेर आठवस..

* यादवराया रानी घर ला आयेन कस्सी..
सासुरवासीन बू रुसकन् बसीस कस्सी..। धृ . ।
सासूबाई गयी समजावन ला  , चल चल बू बाई आपलऽ घर ला
अरधो संसार देऊस तोला..., मु नही आवन की आपलऽ घर ला...। १।
ससरो गये समजावन ला , चल चल बू बाई आपलऽ घर ला
तिजोरी की चाबी देऊस तोला.., मु नही आवन की आपलऽ घर ला...। २।
देर गयो समजावन ला , चल चल भाऊज आपलऽ घर ला
नवी आलमारी देऊस तुमला , मु नही आवन की आपलऽ घर ला...। ३।
जाऊबाई गयी समजावन ला , चल चल जाऊबाई आपलऽ घर ला
भारी धट्टी देऊस तुमला , मु नही आवन की आपलऽ घर ला.. ।४।
नंदबाई गयी समजावन ला , चल चल भाऊज आपलऽ घर ला
चांदी को मेखलो देऊस तुमला , मु नही आवन की आपलऽ घर ला.।.५।
लाडो गये समजावन ला , चल चल रानी आपलऽ घर ला
लाल च्याबूक देऊस तोला , आब मु आऊस आपलऽ घर ला...। ६।..

आंगना मऽ मांडी भुलोबा - भुलाबाई की बाईलोग - पोटीना पूंजा करस . आंगना मऽ च मेवो डायकन् दूध आटन ला धरस . पूंजा कऽ बाद मऽ पाच बाटी पर झाकनी झाककन् लुकायकन् राखीस वोनऽ खिरापत की पह्यचान करनो लागस . ज्या जीती वोकऽ साठी टारीना बजावस . सबन ला वा खिरापत बाटस . अरधऽ रात पावतर कोनी सोवत नही . ... कोनी फुगडी खेलस..कोनी जुड्या खेलस ... खेलनो.. हासनो..कुदनो..! असी धारना सऽ कऽ कोन कोन चेता सऽ , वून ला लक्षुमी देवी देखत रव्हस . अरधऽ रात ला चंदर माथा पर आयाकन् वोकी अमरित वाली किरन दूध मऽ पडस . वोकऽ बाद मऽ इ अमरित वालो आटाये दूध को परसाद सबन ला देस .
हासी - खुसी - मज्याक - खेलनऽ - कुदना मऽ इ पर्व कसो गयो , कोनीलाच मालूम नही पडत .

( सहयोग :  पार्वतीबाई महादेवराव देशमुख )
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर



10 comments:

  1. खूब साजरी माहिती सं दादा

    ReplyDelete
  2. माडी....जुन्या दिवसांची आठवन झाली, छान वर्णन केलेले आहे. 🌷🌷

    ReplyDelete
  3. खुब साजरी माहिती
    जय राजाभोज
    जय मायबोली भोयरी

    ReplyDelete
    Replies
    1. धन्यवाद मनोज जी...
      तुमारं सरखं सुज्ञ बाचनी वाला की टिपनी कलम मं जोस भर देस.....

      Delete
  4. खूब साजरो लेख जी

    ReplyDelete