भोयरी संस्कृति - १५ : माडी
भोयरी संस्कृति मऽ आसिन पुनव ला माडी पर्व मनावस . कास्तकार आन् स्यहरी लोगना बी माडी ला धुमधामकन् मनावस . माडी कऽ बखत खरीप की फसल घर मऽ आयी रव्हस . येक परकार कन् घर मऽ आये अनाज की पूंजा करन को इ दिन .
भोयरी संस्कृति मऽ दसरा पासिनच माडी को माहोल तयार होस . पोटुबाटुना दसरा कऽ दुसरऽ दिन पासिन कबड्डी खेलन ला लागस . दसरा पासिन पाचवो दिन माडी को ! येनऽ हफ्ताभर हासी - खुसी , खेलन को माहोल रव्हस .
माडी कऽ दिन चंदर सोरा कला कन् पुरो आन् पुरथी ( पृथ्वी ) कऽ येकदम जवर रव्हस .
माडी पुनव स्यरद रितू मऽ आवस तेकन स्यरद पुनव ! माडीला च स्यरद पुनव , कोजागिरी पुनव , रास पुनव , मानिकेथारी ( मोती तयार करनी वाली ) पुनव , कुमार पुनव , लोख्खी पूंजा कव्हस .
१ . इतिहास : * माडी पुनव को पर्व इ पुरानो लोक उत्सव सऽ . वात्सायन नऽ येला " कौमुदी जागर " आन् वामन पुरान नऽ " दीपदान जागर " कह्येस . येनऽ दिन बली राजा की पूंजा करनो , असो वामन पुरान मऽ सांगेस .
* माडी पुनव ला चंदरलोक मिन सिरी लक्षुमी देवी धरतीलोक पर आवस , असी धारना सऽ . पुरान कऽ अनुसार समुद्र मंथन मिन माडी कऽ लक्षुमी देवी परगट भयी , तेकन माडी ला लक्षुमी देवी को जलमदिन मानस .
* भगवान सिरीकिस्न सोरा कला को अवतार ! द्वापार जुग मऽ बिंदराबन ( वृंदावन ) मऽ भगवान सिरीकिस्न नऽ माडी कऽ रात गोपिका संगऽ महारासलीला रचायती .
२ . माडी का अनोखा रूप :
* माडी ला गुजरात मऽ रास आन् गरबा खेलकन् ' स्यरद पुनम ' कऽ नाव कन् मनावस .
* मिथिला मऽ माडी ला ' कोजागरहा ' या पूंजा करस .
* हिमाचल परदेस मऽ माडी कऽ निमितकन् जत्रा भरस .
* राजस्थान मऽ माडी ला बाईलोग पांढरा कपडा पेहेरकन् चांदी का अलंकार घालस .
* हरयाना मऽ माडी ला खीर बनायकन् आंगना मऽ धरस आन् सकारी वोको परसाद लेस .
* ओडिसा मऽ माडी ला कुमार पुनव कव्हस . येनऽ दिन गजलक्षुमी देवी की पूंजा करस .
* बंगाल मऽ माडी ला लोख्खी पूंजा कव्हस . स्यंख आन् कमल कऽ फुल संग सिरीलक्षुमीनारायन की पूंजा करस .
* माडी कऽ दिन दमा , अस्थमा की दवाई खीर मऽ डायकन् देस .
३ . भुलाबाई : भुलाबाई मनजे पाराबती देवी . येक कथा कऽ अनुसार सारीपाट मऽ भोल्यानाथ पारबती संग हार जास , आन् वूई रुसकन् कयलास पर चली जास . पारबती वून ला मनायकन् वापिस ल्यावस . महादेव पारबती कऽ रूप ला भुल्यो तेकन ' भुलोबा - भूलोजी राव . आन् आदिमाय पारबती नऽ वून ला भुलाये तेकन पारबती ला ' भुलाबाई ' कोस . महाराष्ट्र मऽ अकोला जिला कऽ अकोट ला येकमातर ' भुलजा - भुलाई ' को ३०० बरस पुरानो मंदिर सऽ .
पह्यलऽ भोयर समाज मऽ माडी को पर्व मह्यना भर चलत होतो . बाद मऽ पाच दिन पर आये . आन् आब येक दिन पर !
आंगना मऽ भुलाई की पूंजा मांडस . चऊक पुरस . बिडा कऽ पान पर सुपारी को गनपति मांडस . हरद कुकू , अकसिद , फुल कन् पूंजा करस. दिवो , उदबत्ती लगावस . भुलाबाई का लोकगीत गायकन् बाईलोगना आपलो सुखदुख वोमऽ मांडस . भुलाबाई माहेरवासीन ! सासर की खिल्ली आन् माहेर को गुनगान मज्याक कऽ रूप मऽ येनऽ लोकगीत मऽ दिसस . माहेरवासीन आपलो सासुरवास येनऽ लोकगीत मिन मांडस . हासी - मज्याक बी खूब होस .
* अडकी मऽ जाऊ , खिडकी मऽ जाऊ
खिडकी मऽ होती घागर..
भुलोजी ला पोटु भयो , नाव धरो सागर ।
अडकी मऽ जाऊ , खिडकी मऽ जाऊ
खिडकी मऽ होती दोरी...
भुलोजी ला पोटी भयी , नाव धरो गवरी ।.......
* ..आब तरी जान देव सासूबाई , बावाजी आये लिजान ला.. लिजान ला
कारला को बी लगाव वो बू बाई , मंग जा आपलऽ माहेर ला.. माहेर ला
कारला को बी लगाये सासूबाई , आब तरी जान देव माहेर ला... माहेर ला
कारला को बेल निकरन दे बू बाई , मंग जा आपलऽ माहेर ला ... माहेर ला
कारला को बेल निकऱ्यो सासूबाई , आब तरी जान देव माहेर ला... माहेर ला
कारला ला फुल लागन दे बू बाई , मंग जा आपलऽ माहेर ला ... माहेर ला .........
मला का पुसस बरीच दिसस , पूस आपलऽ ससरा ला... ससरा ला
मला का पुसस बरीच दिसस , पूस आपलऽ लाडा ला... लाडा ला
मालक.. मालक..
दादो आयेस लिजानला , जाऊ काजी माहेर ला.. माहेर ला
काडी हात मऽ मारी पाठ मऽ , तोला मोठो माहेर आठवस... माहेर आठवस..
* यादवराया रानी घर ला आयेन कस्सी..
सासुरवासीन बू रुसकन् बसीस कस्सी..। धृ . ।
सासूबाई गयी समजावन ला , चल चल बू बाई आपलऽ घर ला
अरधो संसार देऊस तोला..., मु नही आवन की आपलऽ घर ला...। १।
ससरो गये समजावन ला , चल चल बू बाई आपलऽ घर ला
तिजोरी की चाबी देऊस तोला.., मु नही आवन की आपलऽ घर ला...। २।
देर गयो समजावन ला , चल चल भाऊज आपलऽ घर ला
नवी आलमारी देऊस तुमला , मु नही आवन की आपलऽ घर ला...। ३।
जाऊबाई गयी समजावन ला , चल चल जाऊबाई आपलऽ घर ला
भारी धट्टी देऊस तुमला , मु नही आवन की आपलऽ घर ला.. ।४।
नंदबाई गयी समजावन ला , चल चल भाऊज आपलऽ घर ला
चांदी को मेखलो देऊस तुमला , मु नही आवन की आपलऽ घर ला.।.५।
लाडो गये समजावन ला , चल चल रानी आपलऽ घर ला
लाल च्याबूक देऊस तोला , आब मु आऊस आपलऽ घर ला...। ६।..
आंगना मऽ मांडी भुलोबा - भुलाबाई की बाईलोग - पोटीना पूंजा करस . आंगना मऽ च मेवो डायकन् दूध आटन ला धरस . पूंजा कऽ बाद मऽ पाच बाटी पर झाकनी झाककन् लुकायकन् राखीस वोनऽ खिरापत की पह्यचान करनो लागस . ज्या जीती वोकऽ साठी टारीना बजावस . सबन ला वा खिरापत बाटस . अरधऽ रात पावतर कोनी सोवत नही . ... कोनी फुगडी खेलस..कोनी जुड्या खेलस ... खेलनो.. हासनो..कुदनो..! असी धारना सऽ कऽ कोन कोन चेता सऽ , वून ला लक्षुमी देवी देखत रव्हस . अरधऽ रात ला चंदर माथा पर आयाकन् वोकी अमरित वाली किरन दूध मऽ पडस . वोकऽ बाद मऽ इ अमरित वालो आटाये दूध को परसाद सबन ला देस .
हासी - खुसी - मज्याक - खेलनऽ - कुदना मऽ इ पर्व कसो गयो , कोनीलाच मालूम नही पडत .
( सहयोग : पार्वतीबाई महादेवराव देशमुख )
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
खूब साजरी माहिती सं दादा
ReplyDeleteधन्यवाद विनोद भाऊ
Deleteमाडी....जुन्या दिवसांची आठवन झाली, छान वर्णन केलेले आहे. 🌷🌷
ReplyDeleteधन्यवाद घागरे सर...
Deleteखुब साजरी माहिती
ReplyDeleteजय राजाभोज
जय मायबोली भोयरी
👌👍💐
Delete👌👍💐
Deleteधन्यवाद मनोज जी...
Deleteतुमारं सरखं सुज्ञ बाचनी वाला की टिपनी कलम मं जोस भर देस.....
👌💐
ReplyDeleteखूब साजरो लेख जी
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