भोयरी संस्कृति - ८ : पोह्यती ( राखी )
पोह्यती , पोयती , राखी रक्षाबंधन
सरावन मह्यना कऽ पुनव ला पोह्यती को तिवार आवस . भाई - बहिन कऽ येनऽ तिवार को भोयरी संस्कृति मऽ खास महत्त्व सऽ . भाई - बहिन को नातो जलमकन् भेटस... जिनगानी ला पुरकन् उरस असो साजरो नातो .
१ . मान्यताये : * भविस्य पुरान मऽ असी कथा सऽ : येकडाव देव - दानव की लढाई चालू भयी . देवना को पाड्डो झुकन ला लाग्यो . राजो इंदरदेव भेबार गया . इंदरदेव ' गुरू बृहस्पती ' कऽ जवर गयो . वहान बसी इंदरदेव की लाडी ' इंद्राणी ' सबन बात आयकत होती . वोनऽ येक रेसमी धागो मंतऱ्यो . गुरू नऽ वू भारे ती धागो इंदरदेव कऽ हात ला बांधे . वू दिन होतो सरावन पुनव को . वा लढाई इंदरदेव नऽ जिती . तब पासून सरावन पुनव कऽ दिन राखी बांधन को रिवाज पड्यो .
* महाभारत मऽ भगवान किसनदेव आन् धुरपदा ( द्रौपदी ) की कथा मऽ सिसुपाल संग कऽ लढाई मऽ किसनदेव कऽ उंगल ला घाव भये . ' द्रौपदी नऽ आपलऽ पदर को कपडो फाडकन् उंगल ला बांध्यो . वू दिन बी सरावन पुनव को होतो .
* वामन अवतार मऽ बी राखी की कथा सऽ . बिस्नूभगवान नऽ बलि राज्या ला हराये . पर राज्या बलि नऽ आपलऽ भक्ती कऽ तप कन् भगवान पासिन रात - दिन आपलऽ आघऽ रव्हन को बचन लेयो . इतऽ बिस्नूभगवान घर नही आये तऽ लक्षुमी देवी परेस्यान भयी . तब नारदमुनी नऽ जुगत सांगी . लक्षुमी देवी नऽ राज्या बलि ला पोह्यती बांधकन् भाई बनायो , आन् बिस्नूभगवान ला घर लायो . उ दिन बी सरावन पुनव को होतो .
* गनपती का पोटुना ( सुभ आन् लाभ ) ला येक बहिन पाह्यजे होती . तब गनपती नऽ होम करकन् संतोसी मा को आव्हान कऱ्यो . पोह्यती , सुभ , लाभ आन् संतोसी मा कऽ नाता कऽ याद मऽ बी यी तिवार मनावस . इ विधान भी सरावन पुनव कऽ दिन सकार कऽ बेरा भयो. , तेकन पोह्यती तिवार मनावस .
२. इतिहास को झरोखो : * सिकंदर कऽ लाडी नऽ पुरू राज्या ला पोह्यतो बांधकन् भाई बनायो आन् सिकन्दर ला नही मारन को बचन लियो .
* मेवाड की रानी कर्मावती नऽ बहादूरस्या कऽ भेवकन् हुमायून ला राखी पठायी , आपलो राज बाचाडन साठी .
* राजपूत जब लढाई पर निकरता तब उनकी लाडीना उनला कुकू को टिरो लगायकन् हात मऽ रेसम को दोरो बांधत होता .
३. पोह्यती को अनोखो रूप : पोह्यती ला उत्तरांचल मऽ ' श्रावणी ' कोस . महाराष्ट्र मऽ नारियल पुनव , राजस्थान मऽ राखी , कही सावनी तऽ कही सलूनो कोस . उसो येनऽ तिवार को आधिकारिक नाव रक्षाबंधन सऽ .
राखी कच्चो सूत , रेसम , सोना - चांदी कन् बनावस .
पोह्यती भाई - बहिन कऽ नाता को खास तिवार सऽ . राखी बामन , गुरू , परिवार की नानी पोटी बी नातलग ला बांधस .
अमरनाथ की यात्रा आखाडी ला चालू होयकन् पोह्यती ला पूरी होस .
४ . देवराखी : येनऽ राखी ला राजस्थान मऽ रामराखी कव्हस . लाल सूत पर पिवरऽ रंग वालऽ गुच्छा वाली देवराखी भगवान ला , दरुजा ला , आलमारी ला , मिसीन - गाडी - मोटर ला , घर ला बांधस . पूंजापाठ मऽ हात ला जी दोरो बांधस वोला बी राखी कोस .
५. पोह्यती ला बहुड्डा की पूंजा करकन् वोला राखी वाह्यस .
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
मो. 7066911969
Khub chhan
ReplyDeleteधन्यवाद भाऊ
Deleteखुब चांगली माहिती स पोह्यतीकी.
ReplyDeleteधन्यवाद जी
ReplyDeleteजय मायबोली भोयरी
ReplyDeleteराखी को त्योहार को बारे में इतिहास जोड़ था आपने बहुत अच्छे लेख लिखे हैं सभी विचारों को नमन अभिनंदन भैया।
ReplyDeleteधन्यवाद देशमुख सर
Deleteखुप साजरो
ReplyDeleteधन्यवाद ढोबाळे सर
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