मॉं मराठी
मराठवाडा का उदगीर
जिस का लातूर नाम जिला
अखिल भारतीय मराठी
साहित्य सम्मेलन का मेला ।
मराठी साहित्य पंढरी की
९५ वी यह मौक्तिकमाला
साहित्य दर्शन , मंथन का
यह साहित्यिक कुंभ मेला ।
सभी नवोदित , प्रस्थापित
सारस्वत का संस्कृति रेला
अभिजात मराठी का पर्व
कोई गुरूवर कोई चेला ।
झलकता शब्दों का अमृत
कही चुभता प्रखर भाला
काव्य की रिमझिम फुहार
कही धधकती शब्द ज्वाला ।
वैखरी , मध्यमा , परा , पश्यन्ति
वाणी का अद्भूत शिवाला
मॉं मराठी के ध्वजवाहक
चहुंओर फैलाये उजाला ।
रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
अच्छी रचना जी।
ReplyDeleteबहुत बहुत बधाई लेखक महोदय जी