अजब गजब - ९० : सरदार बाज सिंह जी पवार
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
मालवा सिन पवार / पुआर / परमार देस म चारी कितअ बगऱ्या . येनअ कडी म च , सम्राट विक्रमादित्य क २६ वी पीढी को येक परिवार मालवा सिन पंजाब म गयो . येनअ परिवार क राव नथिया जी ला ८ पोटूना होता . बडो पोरग्यो सरदार भगवंत सिंह बंगेश्वर मोठो वीर होतो . आन् नान्हो पोरग्यो बाज सिंह जी पवार !
पवार परिवार कितअ बंगश की सूबेदारी होती . भगवंत सिंह बंगेश्वर जी राजपाट चल्या रह्यात्या . अन् सरकार - ए - बंगश का उमराव होता सरदार बाज सिंह जी पवार . बाज सिंह जी जवर २००० घुडसवार होता .
गुरू गोविंदसिंग की हात कन् वीर बाज सिंह जी को संस्कार भयेतो .
इ.स. १७०८ म वीर बाज सिंह जी दक्कन आया . गुरू गोविंदसिंग जी न बंदा बहादुर जी संगअ वीर बाज सिंह जी ला पंजाब म पठायो .
मई इ.स. १७१० म सरहिंद की नामी लढाई छप्पर चिरी इलाका म भयी . नवाब वजीर खान संगअ वीर बाज सिंह जी को सीधो मुकाबलो भयो . वीर बाज सिंह जी न येक च वार कन् वजीर खान को घोडो माऱ्यो . वीर बाज सिंह जी बिजली सरखी चालती तलवार क आघअ वजीर खान हार गयो . वून न वजीर खान ला बंदी बनायो .
येनअ इतिहास परसिध्द युद्ध क बाद राव सरदार बाज सिंह जी पवार खालसा राज का पह्यला गवर्नर बन्या . या इतिहास की पह्यली घटना होती . इ.स. १७१० पासीन १७१५ वरी वून न राज कऱ्यो . तब वून को राज जमुना पासीन सतलुज नदी वरी होतो . वूई सरहिंद का बेताज बादस्या होता . वून क नाव कन् मुगल फऊज लरलर कापत होती .
आपलअ राज म वीर बाज सिंह जी न किसान - कास्तकार क भला साठी खूब काम कऱ्यो . वून म उम्मीद आन् हिम्मत जगाई , जोस भऱ्यो ! आपलो हक खुद लड कन् लेनो लागस , भावना जगाई. वून क राज म खेती चांगलो विकास भयो . जमिनदार लोगना की मनमानी वून न खतम करी . किसान को पटियाला राज थापित भयो .
इ.स. १७१५ म वीर बाज सिंह जी ला धोखा कन् , गुरदास नांगल जवर मुगल फऊज न पकड्यो . ९ जून १७१६ ला वीर बाज सिंह जी , वून का ७ भाई अन् साथी बंदा बहादुर सिंह जी ला मुगल राज्या न फासी की सजा देयी .
फासी देन क बेरा मुगल बादस्या फर्रुखसियर न कह्ये क , ' कहान स जंगी बाज बहादुर और वो की बहादुरी ?'
' मु बाजे सिंह ! म्हरा हात पाय खोल , तब दिखाडूस तोला , कोन स बाज बहादुर आन् वकी बहादुरी ! ' वीर बाज सिंह जी पवार सिंग सरखो गरज्यो .
मुगल बादस्या चिढ गयो . वोनअ वीर बाज सिंह जी पवार का हात पाय खोलन को आदेस देयो . जसा वीर बाज सिंह जी का हात पाय खोल्या , वून बिजली क फुरती कन १६ मुगल सयनिक काट डाया . वीर बाज सिंह जी को अवतार देख कन् मुगल बादस्यो वहान सिन भाग गयो...
असा वीर आमारा पूर्वज ! धन्य आमारा पितर !
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
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ReplyDeleteवीर बाज सिंह पवार की बहादुरी के बारे में बहुत ही अच्छी ऐतिहासिक जानकारी दी है अभिनंदन जी
ReplyDeleteधन्यवाद जी 🙏
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