पांडुरंग
( भोयरी कविता )
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
रंगोरंगी की दुनिया
समायीस येक रंग
नीरो अगास मंतऱ्यो
घनस्याम सिरीरंग ।१।
केतो अरज्यो नपुऱ्यो
लागी तुरसी पासंग
रासलीला खेल कन
कसो रव्हस निसंग ।२।
बाजी मुरली की धुन
भया जीव जंतू दंग
इठु सावरा की धुन
हर मुंडा म अभंग ।३।
नदी नाला जसा जास
सागर म आपरंग
उसी जिंदगानी गति
येकरूप पांडुरंग ।४।
भाव बाहिर मंझार
चित ध्यान येकरंग
देवबाप्पा न रंगायो
अनंत को चितरंग ।५।
रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
खूब साजरी कविता जी
ReplyDeleteधन्यवाद जी 🙏🙏
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