Sunday, January 9, 2022

नवो साल ( भोयरी कविता ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

नवो साल ( भोयरी कविता ) 
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

मोठी उम्मीद लेकन
आयो आयो नवो साल
वोमिकरान दिखाडे
रोज रोज नवो ताल ।१।

भयी दादा गारपीट
खसी घर की मयाल
सोयो गहू गऱ्या संतरा
कास्तकार गा बेहाल ।२।

दुय लाट आयी गयी
आबऽ तीसरी की चाल
असी भेबारी जिंदगी
भयो जगनो मुहाल ।३।

भेवाडस हर दिन
लेई लस गतसाल
जास घाव देय कन्
नवो भरोसा को साल ।४।

काय की येतरी बानी
काह्ये करस गो हाल
तोरा फुट्यास का डोरा
म्हरऽ इट्ठल गोपाल ।५।

मोह्यतूर ला च नाट
आब च येतरा हाल
न्हाय सहीन जोगती
बाचाडो जी महाकाल ।६।

लागी उठानी जिंदगी
सारो बह्यक्यो गा ताल
दुय ठेंब किरपा का
बापा मुंडा म त घाल ।७।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

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