अजब गजब - ८६ : मठ ख्याल , जैसलमेर
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
पवन ही जोग पवन ही भोग , पवन इ हरै छतीसौ रोग ।
या पवन कोई जाणे भव् , सो आपे करता आपे दैव ।
ग्यान सरीखा गिरु ना मिलिया , चित्त सरीखा चेला
मन सरीखा मेलु ना मिलिया , ताथै गोरख फिरै अकेला ।।
राजस्थान क जयसलमेर जिला म म्याजलार पासीन ८ कि. मी. दूर , भारत - पाकिस्तान हद जवर मठ ख्याला स . जयसलमेर पासीन ११० कि. मी. दूर येन मठ ख्याला की किरती दुनिया भर म स . मध्य जुग म खूब बाहाडे नाथ संप्रदाय को इ येक पावन तीरथ !
परमार वंसी सोढा राजपूत क आस्था को इ मुख्य केंद्र स . भाटी राजपूत , सिंधी लोहाणा अन इलाखा क लोगना को सरधा को मठ ख्याला भारत आन् पाकिस्तान म घाडो परसिध्द स .
# इतिहास अन् मान्यता : * मठ ख्याला की आदिगद्दी को स्थान रतेकोट , जि. सांघड , सिंध - पाकिस्तान म स .
* बि. स. १८८५ म सोढा सरदार क संग गुरू सेहजनाथ जी बयसाखी तीरथ , जयसलमेर यातरा पर रतेकोट ( पाकिस्तान ) सिन आयाता . नाथजी की महिमा आयक कन् भाटी महारावल वून क दरस्यन साठी आया . राज म दुय साल पासीन अकाल पड्योतो . राजा न कह्ये , ' नाथजी किरपा करो .' नाथजी क सिध्दी कन् राज म बरसाद भयी ... अकाल मिट्यो . तब म्याजलार म धूणा की थापना भयी .
* इ.स. १९७१ क भारत - पाकिस्तान लढाई म पाकिस्तान क फऊज न मठ ख्याला पर हमलो कऱ्यो . मठ क धूणा म को चिमटो काहाडन की कोसिस करी . चिमटो त जागा पर च रह्यो , पर वोम का कयी सयनिक अंधरा भय गया... भगवान भोलेनाथ की लीला देख कन् बाकी बाच्या खुच्या सयनिक असा भाग्या क दुनन वून न पासऽ मुड कन् बी नी देख्यो .
* मठ ख्याला क गादी प महंत सेहजनाथ , महंत सच्चानाथ , महंत सूरजनाथ , महंत शंभूनाथ , महंत बादलनाथ भया . आब महंत गोरखनाथ स .
# मठ रतेकोट ( पाकिस्तान ) , मठ ख्याला क येक मठ बाडमेर म स . मठ की हरिद्वार ( भारत ) अन् गड हिंगलाज ( सिंध - पाकिस्तान ) म धरमस्याला स .
# मठ ख्याला किला सरीखो मोठो आन् पिवरऽ दगड कन् बांध्येस . कयी कमरा अन् हॉल स . मठ ख्याला म गौशाला , उंट - घोडा बी स .
# मठ ख्याला म चन्दा को रिवाज नहाय . जे ला जी दान करन को होयेन वू करो ... ना लिखापढी ना परचार !
# मठ ख्याला म आवनी वाला भगत की रव्हन , खान - पेन की येवस्था मठ किथिन मुफत म होस .
# महासिवरातरी पासीन च्यार दिन को यहान मेलो भरस . अमरकोट - सिंध ( पाकिस्तान ) पासीन त भारत क कोना कोन्टा मिन हजारो भगत लोग दरस्यन साठी आवस . च्यार दिन महापरसाद , भजन - किरतन को गजर रव्हस .
# धुड्डी ( धुलेंडी ) क दिन मठ ख्याला म स्नेह मिलन को आयोजन होस .
जय आदिनाथ.. जय भोलेनाथ... हर हर महादेव....
( सहयोग : इंजि . जालम सिंह सोढ़ा , जोधपुर )
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
No comments:
Post a Comment