Friday, January 21, 2022

अजब गजब - ८५ : मांडू म पर्व को मांडो. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ८५ : मांडू म पर्व को मांडो
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

मांडू ( मध्य प्रदेस ) की थापना ६ व सदी म भयी , असी मान्यता स . ८ व सदी सीन १३ व सदी वरी मांडू आन् मालवा पर परमार वंस को राज होतो . वोन बेराच यहान कला अन् साहित्य को फयलाव बाहाडे . 
मांडू ला च मांडवगड , मंडपदुर्ग , मंडपाचल , मंडपगिरी , मंडपाद्री , मंडपशैल असा नाव बी स . 
मांडू ला मध्य भारत को कास्मिर कोस . समुंदर क पातरी पासीन ६३४ मीटर उच्ची , १०९ चवरस कि .मी. आराजी को , विंध्य क येक आखरी सेला प बस्ये मांडू ला परमार राज की राजधानी होती . आराजी क हिसाब कन् मांडू किल्लो आसिया म पह्यलऽ नंबर प स . 
धार - मांडू या आपली वयभलस्याली विरासत स . तेक साठी च इ.स. २०१० पासीन " धार - मांडू दरस्यन यातरा " की चलन बी पाडीती . आब लोगना खुद होय कन् च वहान जावन ला लाग्यास , या खूसी की बात स . 
मांडू म ३० डिसेंबर २०२१ पासीन ३ जानेवारी २०२२ वरी पाच दिन , मध्य प्रदेस सरकार क ' राज्य पर्यटन विकास महामंडल ' न ' मांडू महोत्सव ' भराये . अलम दुनिया म मांडू को डंको बाजे पाह्यजे , तेक साठी मांडू को इतिहास , संस्कृति , बेगबेगरी कला , खेल - तमास्यो  , खानपान  , गाव खेडा की जिंदगी असऽ नाना रूप को मांडो च यहान डायेतो . येन पाच दिन क संस्कृति मेला म महाराष्ट्र , गुजरात , मध्य प्रदेस असा कयी राज्य क लोगना न खुद होय कन् च मोठऽ परमान म हाजरी लगायती . पुरानऽ साल की बिदाई आन् नवऽ साल को स्वागत , असो साजरो संजोग येन महा मेला मिन जुड्यो . 
हॉट येयर बलून , सायकलिंग टूर , हेरिटेज अन् मांडू इंस्टाग्राम टूर , तंबू ( कनात ) म रव्हन को अनुभव , कला - शिल्पकला , नाच - गानो , खानपान  , गाव खेडा को रहन सहन , साहसिक खेल , मांडू क वयभव ला देखनो ... येतरा सारा की रेलचेल होती . 
रेवा कुंड पर नरबदा माय क आरती कन् पुरो इलाखो भाराय गयो . फ्यासन सो म मोठी मोठी कंपनी आयीती . धार जिला म क नाच - गानो आन् संगीत लोगना ला घाडो च साजरो लाग्यो . डायनासोर पारक म रात कन् चान्नीना देखन की मजा आयी . 
४०० पासीन ६०० चवरस फुट नाप का ६५ तंबू यहान आवनी वाला साठी बनायाता . 
मांडू महोत्सव को उद्घाटन म . प्र . की पर्यटन मंतरी उषा ठाकूर क हात कन् भयोतो . 
मध्य प्रदेस सरकार क येन संस्कृति जतन क रंगारंग महोत्सव अन् काम ला दुय हात जोड कन् नमन !

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

2 comments:

  1. अद्भुत इतिहासिक जानकारी जी

    ReplyDelete
    Replies
    1. धन्यवाद नन्दलाल जी 🙏

      Delete