Thursday, September 9, 2021

वर्धा माय , खैरवानी. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

वर्धा माय , खैरवानी
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

9 सितंबर 2021, दिन बुधवार ला धनगवरी ( नांगदेव ) , खैरवानी दरस्यन को मोह्यतूर निकरे ! संगऽ सुरेश मानमोडे , प्रकाशजी आन् विकास बी होता . आभार कारोकिटाड होतो . दुय तीन दिन पासिन झड लागीती . मानमोडे जी न कार की पूंजा करी , अन् मुनऽ इस्टेरिंग संभाल्यो . सकारी 8 बज्या नागपूर सिन निकऱ्या . बरसाद कन् सारोळा सद् सद् होतो आन् ठंडी बी बाजत होती . नागपूर परीन पांढुरना पुग्या . काल च यहान परसिध्द ' गोटमार मेलोइ ' भयेतो . नदी क दुय आंग गोटा का ढीग पड्याता . येक JCB अन् ट्र्याक्टर गोटाना सावडकन् फेक रह्याता . नदी काठ क देऊर ला टट्टाना कन् झाकेतो . 
पांढुरना पार करकन् मल्हारा पंखा पासिन जेवनहात ला नानी सडक प पलट्या आन् धनगवरी को रस्तो पकड्यो . चिखलीकला पासिन ' मुलताई - छिंदवाडा ' सडक वलांडकन् डाखऽ हात प पलट्या . झमाझम बारिस होय रह्यीती . गोस्टीमाता करता करता धनगवरी आयो . देऊर ला टालो लाग्येतो . बाह्यरीन च पूंजापाती करी आन् हात जोड्या . धनगवरी जवर क नदी पर च डोमनसेस को देऊर स . 
धनगवरी जवर च ढाकरबाडी ला मानमोडेजी की आतोबहिन रव्हस . नारायण देशमुख कितऽ खानोपेनो भयो . इत उत की बातचीत भयी . 
नागद्वार , पचमढी यातरा की ' धनगवरी ' ला पह्यली पायरी मानस , यासिन जुन्नारदेव ला जास . 
ढाकरबाडी परिन मोरनढाना ला आया . मानमोडेजी को परिवार यहान को च स . चारी कितऽ खेत म मका च मका ! ( भुट्टा ). येक क पास येक दुय चार घर च्या पानी भयो . वहान ' भोयरी संस्कृति ' किताब बाटी . मुलताई - दुनावा को पट्टो खोवा साठी परसिध्द स . वासिन चार पाच किलो खोवो लेयो . 
आब वापसी म खैरवानी ला जान को होतो . मध्य परदेस क बयतूल जिला म क मुलताई तहसील म खैरवानी गाव जवर वर्धा नदी को उद्गम स . ८११ मीटर उचाई को वरधन सिखर वर्धा माय को जलमस्थान . मध्य परदेस म ३२ कि.मी. को सफर कर कन् वर्धा नदी मोवाड जवरीन महाराष्ट्र म आवस . घुग्घुस जवर ( वढा संगम ) वर्धा नदी ला पैनगंगा नदी मिरस . आघ वैनगंगा नदी ला वर्धा नदी मिरस आन् या दुय नदीना गोदावरी नदी ला भेटकन् प्राणहिता म समाहित होय जास . 
सतपुडा परबत क साजरपन म वर्धा अन् सूर्व्यपुत्री ताप्ती चार चांद लगाय देस . वर्धा माय आन् ताप्ती नदी ( मुलताई ) को उद्गम मेक दुसरा पासिन सिरफ ११ कि.मी. दूर स. 
वर्धा नदी क उद्गम स्थल पर कपिल मुनी न जप तप करेतो , असी मान्यता स . वर देन क कारन नदी को नाव ' वरदा ' पड्यो ; जी कालांतर म वरधा... वर्धा भयो . 
भूदान आंदोलन क बखत यहान विनोबा भावे जी आयाता . महात्मा गांधी जी बी यहान आयाता . 
खैरवानी गाव क सरकारी दवाखाना पासिन वर्धा नदी उद्गम स्धल वरी कच्ची सडक बनीस . किचड कादा क डर कन् आमी न कार दवाखाना जवर च उभी करी . वासिन १ कि.मी. पयदल गया . आमारो डर बेकार च होतो . कार उद्गम स्थल वरी आराम कन् आई रह्यीती . पर आब इलाज नी होतो . रस्ता पासिन उच्ची जागा प वर्धा माय को पक्को चवकोनी बांध्ये  पवितर कुंड स . येन कुंड म पाच गह्यरा भीर सरखा कुंड स . वून मिन कब कब पानी को उबाल आवस . कुंड क वरतऽ क बाजू वर्धा माय की नानीसी मूरती आन् देऊर स . कुंड क काठा प आब भगवान भोल्यानाथ की साजरी अन् उच्ची मूरती बनाईस . कुंड क येक सेला प ' श्री वर्ध्यश्वर महादेव मंदिर ' स . वर्धा माय देऊर क येक आंग कपिल मुनी की मूरती स . कुंड आन् देऊरना सवान रफाड म स . कुंड पासिन येक दुय खेत दूर बंधारो स . रस्ता क काठा पर च खैरवानी क कसलीकर कोई कोठो स . वून कोई दूय चार येकट खेत पानी म गयेस . 
वर्धा माय क उद्गम स्थल प तीर संगरात ला तीन दिन को मेलो लागस ‌. कलस यातरा आन् ' पंचकुंडीय गायत्री महायज्ञ ' बी होस . 
वापसी म पानी को जोर बाहाडे . कार पावतर आवत वरी आमी वला भया . झाक पडीती . दिनबुड्या आमी नागपूर ला आवन साठी निकऱ्या . वर्धा माय क उद्गम स्थल ( खैरवानी ) का दरस्यन कर कन् आमी धन्य भया . 

वर्धा माय की आरती 

ॐ जय वर्धा माता , श्री वर्धा गंगा माता
जी बी आया स्यरन म , दुख वून का हरता ।धृ।

गाव खैरवानी नाव , गढ वरधन माता
बिस्नु देव अवतार , पानी वराह भरता ।१।

तप कपिल मुनी को , भयेस सफल माता
रिसी वसिस्ठ भगत , होम कोटी न करता ।२।

सुभ पावन मंगल , टारै अमंगल माता
तोरऽ कोरा म आसरो , माय बुध्दी सिध्दी दाता ।३।

कुर भोयर संभाले , रिन नी फिटेय माता 
आमी पोटुबाटूना की , तुमी च स माता पिता ।४।

देवी मायना निबजी , तोर पानी कन् माता
करू तुमारी आरती , गावूस किरती माता ।५।

वरदा वरदायिनी , राम किस्न की वीरता
बोलु हर हर गंगे , बेद पुरान की गाथा ।६ ।

पानी तोरो अमरित , नाद कलकल गीता 
जोत चंदर तुमारी , मन भाये सितलता ।७।

गाये सुरेस नित् दिन , तुमारी किरपा कथा
पावू परमगती ला , पाय तुमार च माथा ।८।

लेखक / रचना : इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

2 comments:

  1. वर्धा नदी के उद्गम स्थल खैरवाणी का आपने बहुत ही विस्तृत वर्णन किया है बहुत बढ़िया

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