Tuesday, September 28, 2021

टप्या रस्ता पर काटा ( भोयरी कविता ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

टप्या रस्ता पर काटा
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

दिठ लागेन वो तोला
तूच म्हरी जिंदगानी
आये आंग पर काटा
जब लह्यराये बेनी ।१।

देख कसो रुत्यो काटो 
डोरा म झलके पानी
तोर काटा क सल की 
म्हर आंग झनझनी ।२।

रुत्यो काटो बोराटी को
म्हरी सकवार रानी
तोर नाजूक पाय ला
भूली काटा की च अनी ।३।

धर मांडी पर पाय
वोकी देखूस निस्यानी
काटा कन च काढूस
पुस डोरा म को पानी ।४।

रोय रोय कन् मुंडो
तोरो गांजर क वानी
पापनी क केस कन
वोला अध्धर टांगनी ।५।

सोस उलीसो चटको
म्हरी हिरदा की रानी
न्हाय कुरूप को धोखो
डाग बिब्बा को कारनी ।६।

तोरी मखमाली काया
तोर चाल म हरनी
टप्या रस्ता पर काटा
बोर भराटी क वानी ।७।

म्हर पाडुकल्या बस
काहे लाजस दिवानी
तोर दुख ला झेलून
या स म्हरी वाली बानी ।८।

रचना : इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

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