Saturday, September 18, 2021

भोयरी संस्कृति ४५ : खेंडो. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

भोयरी संस्कृति ४५ : खेंडो
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

सिंधू नदी माय क कोरा म भोयर खेल्या... नाना का मोठा भया . ४५०० बरस पह्यलऽ पासिन सिंधू संस्कृति म पराटी ( कापूस / कपास ) की खूब खेती होत होती.. कापूस को मोठो बेपार होत होतो . कपडा साठी कापूस ,  ऊन अन् रेसम को बापर होत होतो . सुती कपडा प पक्को रंग चढावन की कला बी मालूम होती . वासिन दुनिया म कपडा को मोठो बेपार होतो . सिंधू संस्कृति क पतन क बाद बी कपडा को बेपार होत च होतो . 
कपडा पेहरन को परकार जाति , भूगोल , हवा पानी , संस्कृति परंपरा क हिसाब कन् रव्हस ‌.
१ . इतिहास : * उत्तर वयदिक कार म पेहराव का निवी , वास अन् अधिवास इ भाग होता . 
* ' शतपथ ब्राह्मण ' म रेसम अन् ऊन क बापर को उल्लेख स .
* रामायन कार म लाडा -  लाडी बिह्या म रेसम का कपडा च पेहरत होता . 
* बौद्ध साहित्य म कपडा का नाव : सन का कपडो = खोमन , सूती कपडो = कप्पासीकम , रेसमी कपडो = कोस्सेयम . 
* इजिप्त देस क ' ममी ' ला भारत क मलमल क कपडा म लपेटत होता ‌ .
* २७०० बरस पह्यले आयो चीनी भिकसू यातरी ह्युन सियांग न लिख्येस क भारत देस म पांढरा कपडा च जास्त पेहरस . 
* गृत्समद रिसी न कपास पासिन कपडो बनावन की कला सिखाई , असी मान्यता स . 
* राज क हिसाब कन् पेहराव म बदलाव भयो . मौर्य , कुस्यान , गुप्त , सातवाहन राज म पेहराव को तरीको बदल्यो . पेहराव प मंगोल , यूनानी , अफगानी , मध्य आसिया क तरीका को बी असर पड्यो . 
२. पीतांबर : * पीतांबर को मतलब कोसा को ( रेसम ) धोतर . धारमिक विधी म अन् मंगल काज म रेसमी धोतर पेहरस . जेन कोसा क धोतर ला जरी काठ रव्हस , वोला ' पीतांबर ' कोस . पीतांबर  मानुस अन् बाई बी पेहरस . मानुस को साडे पाच वार को  ' मरदाना पीतांबर ' अन् बाई को आठ वार को  ' जनाना पीतांबर ' ! 
* पीतांबर ला पवितर मानस . कोसो ( रेसम ) बिगर धोये पानी सिपडकन् सुध्द होस , असी धारना स . बिह्या क बेरा ससरो नवरदेव ला पीतांबर को आहेर करन को रिवाज होतो . बिह्या साठी मामो भासी ला ( लाडी ला ) पीतांबरी साडी देत होतो , नी त खेंडो ( पिवरी साडी ) देत होतो . सब सिन सस्ती पिवरी साडी मनजे हरद कन् पिवरी करी ती पांढरी साडी ! येला मराठी म ' अष्टपुत्री ' कोस . हिंदी म येला ' पियरी ' कोस . पीतांबरी रवो क खेंडो रवो , लाडी क डोकसा पर अकसिदना येन पिवरी साडी म च पड्या पायजेन , येको नेम होतो . उत्तर भारत म बी बिह्या क बेरा लाडी पिवरी साडी च पेहरत होती . 
* पिवरो रंग देवी -  देवता क पसंद को रंग स . भगवान बिस्नु देव बी पीतांबर च पेहरस . पिवरऽ रंग ला सूर्व्य देव , मंगल - बृहस्पती गिऱ्या को रंग मानस . पिवरो रंग मनजे ' उजिड ' को रंग ! पिवरो रंग मनजे सादगी अन् निरमलता को रंग ! 
* बिह्या भया बास्त लाडी ला प्यार अन् माय ला दुत्कार साठी कहावत स , ' माय क लुगडा ला बारा गाठी , लाडी ला पीतांबर धट्टी ' . 
📝 असो इ भुल्यो बिसऱ्यौ ' खेंडा ' को पुरान ! 

लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर 


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