Monday, July 26, 2021

अजब गजब - ७३ : वीर कुंवर चैन सिंह जी. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ७३ : वीर कुंवर चैन सिंह
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
शहिदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले ,
वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशॉं होगा ।

मध्य परदेस क राजगढ़ जिला म ३०० बरस पुरानो अन् भोपाल पासिन ८३ कि.मी. दूर नरसिंहगढ़ स . दीवान परसराम म इ.स. १६८१ म यकी स्थापना करीती . नरसिंहगढ़ रियासत पर उमठ परमार वंस को राज होतो . 
* शहीद वीर कुंवर चैन सिंह जी उमठ परमार वंस क नरसिंहगढ़ रियासत का राजकुमार होता . भोपाल पासिन ३५ कि.मी. दूर पसचिम म भोपाल - इंदौर सडक प अंगरेज की फऊज छावनी होती . वूई अगल बगल क रियासत ला घाडाच तरास देत होता अन् पेंसन क बदला म रियासत सोडन ला कव्हत होता . नरसिंहगढ़ रियासत वून को आयकत नी होती . जनरल मैडॉक अन् जानसन न नरसिंहगढ़ ला कयी डाव इतल्लो पठायतो  . तब नरसिंहगढ़ का युवराज वीर कुंवर चैन सिंह जी भेटन ला गया . वून क संग हरदम हिम्मत खान , बहादुर खान अन् लाडलो सेरू नाव को कुतरो रव्हत च होता . हिम्मत खान अन् बहादुर खान इ सारंगपुर जवर क गाव धनौरा का सग्गा भाई होता . बयठक भयी पर कोनतोच नतिजो नी निकऱ्यो . 
* अंगरेज न अऊर निरोप धाड्यो . तब वीर कुंवर चैन सिंह जी न वून सिन टक्कर लेन की सोची . तब वीर कुंवर चैन सिंह जी की उमर सिरफ २३ बरस होती . वीर कुंवर चैन सिंह जी कायी जागीरदार , हिम्मत खान - बहादुर खान , सेरू अन् ४३ सयनिक लेकन चाल पड्या देस क दुसमन सिन बगावत करन साठी ! जिन को वंस आघ नी बाहाडेतो , वून ला वीर कुंवर चैन सिंह जी न पासऽ धाडे . वून ला मालूम होतो क लढाई म बाचन की गुंजाईस नहाय ... वून ला लढाई म मरनो कबुल होतो पर अंगरेज की गुलामी कबुल नी होती . अंगरेज क फऊज क आघ वूई चिंटी सरखा होता पर देसभक्ती को जजबो हत्ती सरखो होतो ! 
* २४ जुलाई १८२४ ला वीर कुंवर चैन सिंह जी अंगरेज क छावनी कितऽ रवाना भया . लाला भागीरथ क हाथ कन् इतल्लो पठायो . वीर कुंवर चैन सिंह जी अन् जनरल मैडॉक की भेट भयी . जनरल मैडॉक न वून क तलवार की तारीफ कर कन् येक तलवार लेय डाली . वोन अऊर दुसरऽ तलवार की तारीफ करी . वीर कुंवर चैन सिंह जी समझ गया क जनरल मैडॉक क मन म खोट स . वीर कुंवर चैन सिंह जी न बिजली क फुरती कन् वोपर हमलो कऱ्यो . अंगरेजी फऊज पह्यले पासिन च लढाई साठी तयार होती . घनघोर लढाई भयी . या लढाई दिवा अन् तुफान को मुकाबलो होतो ! वीर कुंवर चैन सिंह जी न अंगरेज क अस्टधातु कन् बनी तोप प तलवार कन् वार कऱ्यो . तलवार कन् तोप त कटी पर वून की तलवार वोम फस गयी . आन् यहान च घात भयो . तोपची न सीधऽ वीर कुंवर चैन सिंह जी क गरदन प वार कऱ्यो . वून को मुंडो वहान च कट कन पड्यो . वून को घोडो वीर कुंवर चैन सिंह जी क धड ला लेकन नरसिंहगढ़ आयो . वीर कुंवर चैन सिंह जी का सबन संगी साथी ला  वीरगती भेटी , येम सेरू बी आयो ! 
* वीर कुंवर चैन सिंह जी स्यहीद भया , असी खबर कुंवरानी जी ( राजावत जी ठिकाना मुवालिया )  ला भेटी . वून न तब पासिन अन्नत्याग कऱ्यो . सारऽ जिंदगी भर वून न झाडपत्ती अन् कंदमुर - फर पर च गुजारो कऱ्यो . परसुराम सागर जवर वून न देऊर बनायो , जेला कुंवरानी मंदिर कोस . 
* वीर कुंवर चैन सिंह जी की येक समाधी सीहोर - इंदौर सडक प लोटिया नदी काठऽ दसरा वाला मयदान पासिन २ कि.मी. दूर स . ( यहान लढाई भयीती .)  दुसरी समाधी नरसिंहगढ म स . स्यहीद वीर कुंवर चैन सिंह जी की देव रूप म पूंजा होस . वून क समाधी प कंकड धर कन् नवस मानस . 
* आमाला इ.स. १८५७ की अंगरेज सिन की लढाई मालुम स . पर वोक ३३ बरस पह्यले च वीर कुंवर चैन सिंह जी न स्वतंत्रता क होम म आपली आहुति देयीती . अंगरेज क खिलाफ स्वराज साठी , देस साठी पह्यलो स्यहीद , वीर कुंवर चैन सिंह जी स . 
* इ.स. २०१५ पासिन सिहोर क छतरी ( समाधी ) प सरकार किथीन ' गार्ड ऑफ ऑनर ' सुरू भयो . 
२४ जुलाई ला सिहोर अन् नरसिंहगढ़ क छतरी प हर साल सरकार किथीन ' गार्ड ऑफ ऑनर ' देना म आवस . 
२४ जुलाई ला ' बलिदान दिवस ' क रूप म मनावस . 
' जय स्यहीद वीर कुंवर चैन सिंह महाराज जी की ..'

( सहयोग : इंजि . जालमसिंह सोढा जी जोधपुर ) 
लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर 

1 comment:

  1. अद्भुत इतिहासिक जानकारी

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