अजब गजब - ६६ : हिंगलाज माता मंदिर
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
पाकिस्तान क कब्जावालऽ बलूचिस्तान इलाखा म हिंगोल नदी जवर क पहाड प हिंगलाज माता को मंदिर स . इ स्थान हिंदू भगत क आस्था आन् ५१ स्यक्तिपीठ म को येक तीरथ स . कराची परीन पक्की सडक स . पह्यलऽ क जमाना म सडक को नामोनिशान नी होतो , तब उट परीन यातरा करत होता .
कराची परीन ६/७ मयील प हाव नदी आवस , यासीन हिंगलाज की यातरा चालू होस . यहान आन ( शपथ ) लेन की विधी होस . यासीन हिंगलाज यातरा अन् वासीन वापिस यहान आवत वरी संन्यास लेनो लागस . यहान च छडी पूजन होस . रात भर आराम कर कन् झुंझुरका च ' हिंगलाज माता की जय ' बोल कन् यातरा चालू होस . हिंगोल यातरा करनी वाला हजामत कर कन् पूंजा करस अन् जनेऊ पेहरस .
कराची परीन हिंगलाज १२० कि.मी. दूर स अन् पक्की सडक बी आब बनीस , तेकन मोटारगाडी , बस , जीप कन् यातरा करन की सुबिधा भयीस .
येन इलाखा की हिंगोल सबसीन मोठी नदी स . नदी पासीन १५ मयील प चंदरकूप पहाड ( mud volcano ) स . रस्ता म आसापुरा नाव को तीरथ आवस . यहान यातरा का कपडा काहाडकन् गरीबगुदा ला बाटस , आन् आंग धोय कन् साफ कपडा पेहरस . यासीन आघ २००० बरस पुरानो काली माय को देऊर लागस . काली माय की पूंजा कर कन् भगत हिंगलाज माता साठी रवाना होस . पहाड म चेंगन क बेरा रस्ता म गोड पानी की ३ भीर स . आघ पहाड क गुफा म हिंगलाज माता को ठानो स . गुफा सेलमेल स , जेकऽ दुसरऽ मुंडा प गुरू गोरखनाथ कुंड स . हिंगलाज माय येन च कुंड म न्हावस , असी मान्यता स .
१. मंदिर को स्वरूप : उच्ची पहाड क गुफा म माय को ' विग्रह रूप ' बिराजमान स . ( इ रूप वैस्नो देवी क रूप सरिखो दिसस .) यहान माता सती कोटटरी रूप म आन् भगवान सिव भीमलोचन भयरव क रूप म स . यहान सिरी गनेस , कालिका माता की मूरती स आन् बरमकुंड , तीरकुंड नाव कख का तीरथ स .
२. इतिहास अन् मान्यता : * पुरान क अनुसार जब भगवान भोलेनाथ मयत सती माय ला लेकन तांडव करन ला लाग्यो , तब दुनिया ला बाचाडन साठी भगवान बिस्नु देव न सुदरस्यन चक्कर कन् सती माय क आंग का ५१ टुकडा कऱ्या . हिंगलाज मंदिर म सती माय को डोकसो पड्यो , असी मान्यता स .
* रावन वध को पाप धोवन साठी भगवान सिरी राम न हिंगलाज माता की पूंजा करीती .
* पुरान क अनुसार भगवान परसुराम क दाआजी महरसी जमदगनी न यहान घोर तप कऱ्योतो , जेला आब आसापुरा स्थान कोस .
* हिंगलाज माय क पूंजा - आराधना साठी गुरू गोरखनाथ , गुरू नानक देव , दादा मखान सरीखा महान संत महात्मा यहान आयाता .
* अंगरेज क जमाना म बलूचिस्तान का ३ टुकडा भयाता . येक अंगरेज बलूचिस्तान , दुसरो करद राज म होतो अन् तीसरा प ईरान को अंमल होतो . आब येक भाग ईरान आन् दुय भाग पाकिस्तान क कब्जा म स . बटवारा क पह्यले भारत की हद अफगानिस्तान अन् ईरान वरी होती . वोन बेरा हिंदू को हिंगलाज माय को ठिकानो मुख्य तीरथ होतो . बलूचिस्तान का मुसलमान हिंगलाज माय की पूंजा ' नानी पीर ' कह्य कन् करस . वूई लाल कपडो , उदबत्ती , इतर , सिरनी चढावस . हिंदू को हिंगलाज माय आन् मुसलमान को नानी पीर , असो इ दुय धरम को महातीरथ स .
* जब जब मुस्लिम हमलावर न यहान हमलो कऱ्यो तब तब बलूचिस्तान क हिंदू मुसलमान न मंदिर ला बाचाडे .
* हर रात यहान तमाम स्यक्ति येक होय कन् रास रचस आन् दिन उग्या बास्त हिंगलाज माय म समावस , असी मान्यता स .
* हिंगलाज माय को दरस्यन कऱ्या बिगर चारी धाम अन् कासी यातरा को पून्य नी भेटत , असी मान्यता स . जी बाईलोग हिंगलाज माय को दरस्यन लेसि , वून ला ' हाजियानी ' कोस , आन् हर तीरथ प वून ला सनमान भेटस .
३. माता का चूल : येक डाव माय न परगट होय कन् वरदान देये क , जी भगत म्हरो चूल चालेन , वोकी हर मनोकामना पूरी होयेन . १० फिट लंबऽ जगरा परीन भगत देऊर म जात होता . ( आब या परथा मुडी .)
# साल भर हिंगलाज माय क दरबार म भगत लोगना की चहल पहल रवस . पर नवरातरी म लाखो लोगना माय क दरस्यन साठी आवस .
" हिंगलाज माय की जय ऽ"
लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
महत्वपुर्ण जानकारी
ReplyDeleteधन्यवाद सुधीर जी 🙏
Deleteजय मां हिंगलाज
ReplyDeleteअद्भुत जानकारी