Tuesday, June 29, 2021

महाराणी अजबदे बाई पंवार. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

महाराणी अजबदे बाई पंवार
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

महाराणी अजबदे बाई पंवार को जलम मेवाड क बिजौलिया ठिकाना म इ.स. १५४२ म भयो . अजबदे बाई क माय को नाव हंसाबाई अन् पिताजी को नाव राव मामरख ( रामरख ) सिंह पंवार होतो . अजबदे बाई का गुरू मथुरा का विठ्ठल राय होता . 
अजबदे बाई को बिह्या इ.स. १५५७ म भयो . अजबदे बाई वीर महाराणा प्रताप जी ला परन्याईती . बिह्या क बखत अजबदे बाई की उमर १५ बरस अन् महाराणा प्रताप जी की उमर १७ बरस होती . 
१६ मार्च १५५९ इसवी सन  म अजबदे बाई न भंवर अमरसिंह ला जलम देयो . 
वीर महाराणा प्रतापसिंह क पिताजी को नाव महाराणा उदयसिंह अन् माय को नाव जयवंता बाई होतो . 
महाराणा प्रतापसिंह ला अजबदे बाई म आपली माय जयवंता बाई की च छाया दिसत होती . अजबदे बाई महाराणी जयवंता बाई क मोठऽ लाड की होती . 
महाराणा प्रतापसिंह जी का अनखिन् १० बिह्या भया . पर हर घडी वून ला अजबदे बाई को कप्पो साथ होतो . घर पासिन राजकारन वरी अजबदे बाई महाराणा प्रतापसिंह जी क खांदा ला खांदो लगायकन् उभी रही . 
इ.स. १५६७ म अकबर न चितौडगढ पर हमलो कऱ्यो . तब ४ मह्यना अजबदे बाई राजपिपला रही . 
इ.स. १५७२ म महाराणा उदय सिंह जी को स्वर्गवास भयो . तब महाराणा प्रतापसिंह को राजतिलक भयो अन् अजबदे बाई महाराणी / पटरानी बनी . 
इ.स. १५७२ पासिन १५७६ वरी महाराणी अजबदे बाई गोगुन्दा म रही . 
इ.स. १५७६ म परसिध्द हल्दिघाटी की लढाई भयी . येन लढाई म महाराणी अजबदे बाई का पिताजी महाराजा रामरख पंवार , भाई कुंवर डुंगरसिंह पंवार अन् दुसरो भाई पहाड सिंह पंवार ला वीरमरण आयो . 
महाराणा प्रतापसिंह जी न आब जंगल म रह्यकन् छापामार लढाई करन को बिचार कऱ्यो . आपलऽ राज ला दुसमान क येढा मिन निकारन को होतो... इ मुसकिल अन् तकलिफ वालो फयसलो होतो . 
महाराणी अजबदे बाई न कह्ये क , ' जसी सीता माय भगवान राम संग १४ बरस बनवास म रही ... जसी दरोपदी माय पांडव संग १२ बरस बनवास म रही , उसी च मु बी तुमारऽ संग जंगल म च रवून . जहान तुमी रवजेन , वहान च मु बी संग रवून .' 
महाराणा प्रतापसिंह जी न महाराणी अजबदे बाई ला लय समझाये , पर महाराणी अजबदे बाई आपलऽ फयसला पर अटल रही . महाराणी को भाई ' शुभकरण पंवार ' आखरी वरी संग रह्यो . 
धन्य वीर महाराणा प्रतापसिंह जी , धन्य महाराणी अजबदे बाई अन् धन्य महाराणी अजबदे बाई का भाईना न् पिताजी ! 
जब  राजपुतानो दुसमान क घर पानी भर रहेतो , तब वीर महाराणा प्रतापसिंह जी , महाराणी अजबदे बाई , भाई शुभकरण पंवार दुसमान ला आपली तलवार - भाला - तिरकमठा कन् पानी पाज रह्याता . आपल ऽ जलमभूमी पर आई पापी बिपदा ला जवर खतम नी करून तवर मु जमीन पर च सोवून , असी आन आपलऽ जलमभूमी का सपुत वीर महाराणा प्रतापसिंह जी न लेयीती . 
इ.स. १५८५ म महाराणा प्रतापसिंह जी न ' चावंड ' ला आपली राजधानी बनाई . 
इ.स. १५९० म वीर महाराणा प्रतापसिंह जी की पटरानी अजबदे बाई को चावंड म च देहांत भयो . 
वीर महाराणा प्रतापसिंह जी अन् महाराणी अजबदे बाई पंवार ला कोटी कोटी प्रणाम 🙏🙏.

लेखक : इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

2 comments:

  1. अद्भुत इतिहासिक जानकारी अभिनंदन

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