बाप त् बाप रव्हस
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
बाप त् बाप रव्हस
देव को जाप रव्हस ।धृ.।
माय बाप मावली को
नातो आपोआप रव्हस
तन मन प आपलऽ
वून की च छाप रव्हस ।१।
वावसाड म आसरो
झांजी की झाप रव्हस
ठंडी म ठाठऱ्या पर
आग्टी को ताप रव्हस ।२।
पाड्डो भारी ममता को
अनाप सनाप रव्हस
अगास म उडान को
बाप च नाप रव्हस ।३।
इर भर कस्टऽ म बी
वू आडमाप रव्हस
रात भर डोरा म बी
पोटू को माप रव्हस ।४।
बाप कन् जिंदगानी
अगो टिपटाप रव्हस
गावो कोनतो बी सूर
बाप की आलाप रव्हस ।५।
माय पराटी की वर
तोर वानी बाप रव्हस
माय खेत की जिमिन
धुरो त् बाप रव्हस ।६।
रचना : इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
सही लिखा है आपने हम कितने ही बड़े हो जाएं अनुभव और उम्र में बाप से कम ही होते हैं।
ReplyDeleteधन्यवाद नन्दलाल जी 🙏
Deleteखुप छान ।।।। बाप त बाप रवस ।।।। वाह वाह क्या बात 🙏🙏🙏🙏🙏👏👏
ReplyDeleteधन्यवाद सर 🙏
DeleteKhup chan👌👌
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