Wednesday, June 2, 2021

माया ( भोयरी अभंग ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

माया ( भोयरी अभंग ) 
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

तरहात पर , फाडी धन कीर
लोभ को उकीर , तन मन ऽ ।१।

सरी जी उमर , खप्या इर इर
भवसागर तीर , नी गवसे ।२।

स्यायनो बह्याड , लकीर को फकीर
दिसे नी सुकीर , अगास म ।३।

जुगाड तंतर , पाय दुई तीर
डोरा भिरभिर , फिफोली प ।४।

इपदा को पूर , डगमग्यो धीर 
मेढ गाड्यो बीर , मंझार म ।५।

भेदे जी असार , निस्याना प तीर
माऱ्यो नेम मीर , भला साठी ।६।

नजर भरम , गरीब अमीर
मेंडका की भीर , दुनिया जी ।७।

माया क लोंढा म , बह्या मिठ्ठू कीर 
लाग्या काठऽ तीर , ग्यानवंत ।८।

रचना : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

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