माया ( भोयरी अभंग )
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
तरहात पर , फाडी धन कीर
लोभ को उकीर , तन मन ऽ ।१।
सरी जी उमर , खप्या इर इर
भवसागर तीर , नी गवसे ।२।
स्यायनो बह्याड , लकीर को फकीर
दिसे नी सुकीर , अगास म ।३।
जुगाड तंतर , पाय दुई तीर
डोरा भिरभिर , फिफोली प ।४।
इपदा को पूर , डगमग्यो धीर
मेढ गाड्यो बीर , मंझार म ।५।
भेदे जी असार , निस्याना प तीर
माऱ्यो नेम मीर , भला साठी ।६।
नजर भरम , गरीब अमीर
मेंडका की भीर , दुनिया जी ।७।
माया क लोंढा म , बह्या मिठ्ठू कीर
लाग्या काठऽ तीर , ग्यानवंत ।८।
रचना : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
बहुत बढ़िया
ReplyDeleteधन्यवाद जी 🙏
Deletekhup sajri rachna
ReplyDeleteधन्यवाद जी 🙏
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