अजब गजब ६८ : बोली भास्या
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
भारत क बोली भास्या को पह्यलो सर्व्हे अंगरेज क जमाना म जॉर्ज अब्राहम ग्रिअर्सन क हात खलतऽ भयो . इ.स. १८९८ पासिन १९२८ पावतर , ३० बरस लाग्या येन काम साठी ! यको सारो खरचो अंगरेज सरकार न उठायतो .
आब इ.स. २०११ पासिन दुय बरस बडोदा क डॉ . गणेश देवी न टाटा कंपनी क सहारा कन् आन् लोगना न देई वोन वरगनी कन् बोली को सर्व्हे करेस . ( सरकारी अनुदान नही भेट्ये . )
ग्रिअर्सन क ३० बरस क सर्व्हे म ' भोयरी ' बोली की घाडी जानकारी स . पर डॉ. गणेश देवी क सर्व्हे म भोयरी बोली की जानकारी च नयीती . मु न वून क संग बात करी , पत्र पठाया तब , वून न कह्ये क तुमी भोयरी बोली की जानकारी पठावो ; आघ क किताब म वोला जोडून .
डॉ. गणेश देवी क सर्व्हे म लिखेस क , भारत म की ३०० बोली खतम भयीस आन् १९० बोली खतम होन क रस्ता प स .
इ.स. १९३१ क सिरगनती म वरधा जिला म १४,०८५ , छिंदवाडा जिला म १७,००० आन् बयतूल जिला म १८,००० लोगना ' भोयरी बोली ' बोलस , असो लिख्यो स .
इ.स. १९५४ म भोयरी बोली ला हिंदी क बोली को दरजो भेट्यो .
इ.स. १९६१ क सिरगनती म महाराष्ट्र म सिरफ ५,३८८ लोगना न भोयरी बोली बोलूस , असो कह्ये . येन च सिरगनती म भोयरी बोली मालवी की बोली स , असो कह्येस .
येन च सिरगनती म असो बी लिख्येस क , भारत म क १६५२ बोली भास्या मिन सिरफ १३६५ च बाचीस .
* येन ५० बरस म दुनिया की २०% बोली भास्या खतम भयी .
* भास्या क जानकार लोगना को कवनो स क , इ.स. २०५० पावतर दुनिया की ९६% बोली भास्या अन् लिपी खतम होय जायेन .
# भास्या को इतिहास ७०,००० बरस पुरानो स . भास्या की अवधारना १०,००० बरस पुरानी स . लिखित भास्या को इतिहास ४,००० बरस पुरानो स .
# भारत म १ लाख सिन जास्त लोगना २२ अनुसूचित भास्या अन् १०० गयीर अनुसूचित भास्या बोलस .
४२ बोली भास्या असी स , जेला १० हजार सिन कम लोगना बोलस . आन् असऽ बोली भास्या ला ' लुप्तप्राय ' बोली कव्हस .
# दुनिया की २० % आबादी भारत देस म रव्हस . तेकन भारत म बोली भास्या बी जास्त होती . युनेस्को क इ.स. २०१८ क रपट म , बोली भास्या ला भूलन म भारत देस येक ( अव्वल ) नंबर पर स , असो लिख्येस !
# इ.स. १९७१ ला भारत सरकार न १०८ भास्या की सूची बनाइस . आन् भास्या सम्बन्धी सरकारी निति असी स क , सूची म आवन साठी कोनतऽ बी बोली भास्या का कम स कम १०,००० लोगना वोला बोलनी वाला लागस .
# आब तुमी कह्येन क भयी खतम बोली त भयी .... वोकन का फरक पडस ?
* बोली खतम होन को परिनाम :
➡️ बोली सिरफ बोलन को च माध्यम नहाय . बोली या ' ग्यान साखरी ' ( ज्ञान शृंखला ) रव्हस . बोली म हजारो बरस पासिन को लोकसाहित्य , घरगुती दवाई स्यास्तर , ढोर डंगर क तब्येत पानी की जानकारी , खेती किसानी की जानकारी , हवा पानी की जानकारी , पुरानो ग्यान , संस्कार , नेग दस्तुर , खान पान , सन तिवार , रितभात की बात रव्हस . आन् बोली सप्या कन् ... खतम भया कन् इ हजारो बरस को ग्यान बी येक झटका म खतम होय जास . संस्कृति की वरख , पह्यच्यान खतम होय जास ....
... येको आमाला ना पस्तावो आवस , ना दुख होस !
* बोली भास्या खतम होन को कारन :
➡️ बोली भास्या कन् हीन भावना को सिकार होनो .
➡️ बोली भास्या को स्यब्द कोस अन् व्याकरन नी रव्हनो .
➡️ बोली भास्या लिखित रूप म नी रव्हनो . वको साहित्य नी रव्हनो . ( किताब , कवितासंग्रह , कथासंग्रह , लेख , कादंबरी नी रव्हनो .)
➡️ बोलचाल म बोली भास्या को बापर नी करनो .
➡️ कोनी न लिखे बी त वोला नी बाचनो . कोनी न किताब छपाये त वोला नी खरीदनो आन् नी बाचनो .
लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
बोली भाषा को महत्व विषद करेस...खुप सुंदर विचार 👌👌
ReplyDeleteधन्यवाद नागेश सर
Deleteअद्भुत बोली भाषा की इतिहासिक जानकारी
ReplyDeleteअभिनंदन
धन्यवाद नन्दलाल जी 🙏
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