Thursday, June 17, 2021

अजब गजब ६७ : मितन्नी. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब ६७ : मितन्नी
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी संस्कृति

३५०० बरस पह्यले पसचिम आसिया क सीरिया पासीन भूमध्य संमुदर पावतर येक साम्राज्य होतो , जेको नाव होतो , " मितन्नी "! मितन्नी राजवंस इ संस्कृत भास्या बोलनीवालो सनातन धरम का होतो . यूफ्रेटस अन् टिगरिस नदी  घाटी क ( इराक ) वरतऽ को इलाखो , जी आब उत्तर इराक , सीरिया अन् दकसिन पूरबी तुरकी म आवस , इ इलाखो मितन्नी राज को होतो . 
मितन्नी राज क राजधानी को नाव ' वस्सुकन्नि ( वसुखनि ) ' होतो . वसुखनि को मतलब सोना चांदी की खदान ! 
मितन्नी राज क पसचिम म हित्ती राज होतो . येन दुय राज म हरदम च लढाई झगडो होत होतो . ३५०० बरस पह्यले मितन्नी राजो मतिऊअजा आन् हित्ती राजो शुब्बिलिमा क मंझार समझोतो भयो . समझोता म साक्स्यदार क रूप म वयदिक देवता इंदर , वरुण , मित्र , नासत्य ( अस्विनीकुमार ) को नाव स . यको अभिलेख सापडेस , जेला बोगाजकोई मितन्नी अभिलेख कोस ! 
मितन्नी राजाना को नाव बी संस्कृत म , हिंदू देवता क नाव परिन च रवत होतो , जसो पुरुष , दुश्रत्त ( दशरथ ) , सुवरदत्त , इंद्रोता , सुबंधु , आर्त्ततम . 
आर्य इ स्यब्द मितन्नी संस्कृती , अनातोलिया क हित्ती भास्या अन् इरान क कस्साइट अभिलेख म सापडस . 
लढाई म क रनबांकुरा साठी मितन्नी संस्कृती म '  मर्य ' इ स्यब्द सापडस . रुगवेद म इंदर भगवान क सहयोगी योध्दा साठी बी ' मर्य ' इ च स्यब्द स . 
हर्रियन यहान की स्थानिक भास्या होती . 
लढाई म हिंदू देवता सरखो च रथ आन् घोडा को बापर मितन्नी संस्कृती म होत होतो . 
* संस्कृत ' प्रोटो इंडो युरोपियन ' भास्या परिवार की आदिम भास्या स . येनऽ परिवार मिन ' प्रोटो इंडो इरानियन ' भास्या कुर निकरे , जेकी उन्नती भारत अन् इरान म भयी . ४००० बरस पह्यले भारत म '  रुगवेद '  येनऽ ( संस्कृत की पह्यली लिखित रचना ) संस्कृत पोथी की रचना भयी . इरान म ' अवेस्ता ' की रचना भयी . दुय पोथीना की भास्या मिरती जुरती स . 
४००० बरस पह्यले पासिन पुरऽ आसिया म वयदिक संस्कृती आन् धरम होतो . हिंदू आन् पारसी धरम येका उदाहरन स . 
* अजब गजब ५८ म , मु न पाकिस्तान आन् अफगानिस्तान म क ' परीस्तान ' को लिख्योतो , वू इलाखो बी हिंदू धरम ला माननी वालाना को च होतो . 
* अजब गजब ६१ म , मु न जी यजिदी धरम को लिख्योतो , वू आब बी यहान च स . यजिदी धरम की मान्यता , देऊर अन् परंपरा हिंदू धरम सरिखी च स . 
* अजब गजब ६४ म , अझरबैजान देस ज्वाला मंदिर क रूप आब बी वयदिक धरम की निस्यानी स. 
* आसिया क मंझार मिन युरोप पावतर जी रेसम मारग होतो , वोकन हिंदू / वयदिक धरम आसिया भर फयलेतो . 
* ८ व सदी पासिन अरब लोग आन् मुस्लिम धरम को असो माट्यो आयो क , मारकाट कर कर कन् कई को धरम भरस्ट कऱ्यो . नाव , गाव , भास्या , पेहराव , खानपान पासिन सबन बदल गयो . 
* आपली बोली , संस्कृती , परंपरा , को जतन आपन ला च करनो पडस . आन् यको जतन आमी करबोन , असो म ला भरोसो स . 

लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

5 comments:

  1. सुन्दर रचना खुप साजरो लिखान 👌👌

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  2. खूप साजरी जाणकारी

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