Tuesday, June 15, 2021

चुल. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

चुल
 Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

आब रान्नी मिन उपे
लाल पिवरो उबारो
ठंडी भयी चुल वूल
घास अगिन आसरो ।१।

धुव्वो धुपट गायब
निवा राखड धूपारो
भयी फुकनी बी मुकी
काहे फुकन गा वारो ।२।

जोत निरी निरी जरे
ग्यास सेगडी को तोरो
बिना तकलीफ आग
मोठो वको आसकारो ।३।

खेस खोखलो ठसको
रोज गरतो गा डोरो
हाल भया जी खतम
काडी इंधन को भारो ।४।

चाले बखत क संग
खेल दुनिया को सारो 
धुप बारन ला निवो
तरी लागस च खरो ।५।

रचना : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

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