फायदा को कायदो , भाग - ३
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
गुनवंता आब येक दिन म ६ मानुस की रोजी कमावन ला लाग्यो . वोनऽ रोजी कन् येक मजूर ला काम पर धऱ्यो. मजूर पानी की नाली को ध्यान राखतो आन् कुनी दरन लेय कन् आया वको दरन दरकन् देतो . गुनवंता न अनखिन नवऽ आयडिया म डोकसो खपाये . वोकऽ जवर जेतरो साधन होतो , वोमिन अनखिन नवो जुगाड वू सोचन ला लाग्यो . गरज या खोज की माय स !
गुनवंता क गाव म बिजली नी आयीती . माती क तेल की सिमनी , दिवालगीरी , कंदील कन् काम चालत होतो . बिह्या स्यादी म भाडा की ग्यासबत्ती ल्यावत होता . कई लोगना जवर सेल को रेडू होतो . रात कन् गाव म घुप अंधारो रवत होतो , तेकन बिचूकाटा को भेव बी रवत होतो .
गुनवंतो मोठऽ गाव क मसीन क दुकान म गयो . दुकानदार संग बिजली क बारा म बात करी . दुकानदार न बी बिजली क मसीन को सिरफ आयकेतोच ! वको खरचो केतरो आयेन , यकी वोला बी जानकारी नी होती . दुकानदार न गुनवंता ला जिल्हा क स्यहर म चवकसी करन की सला दी . गुनवंता को येक सोबती वहान सरकारी नवकरी म होतो . दुसरऽ हप्ता म येक कमीज पायजामा को जोड संग लेयकन् गुनवंतो जिल्हा क स्यहर ला गयो . दिनबुड्या वू दोस्त क घर प पुग्यो . इत वूत की गोस्टी माता भयी . जेया बास्त गुनवंता न बिजली मसीन की गोस्ट काहाडी . दोस्त न कह्ये क सकारकन् आफिस स , परोगदिन मला सुट्टी स , तब आपन चवकसी करबोन . दुसरऽ दिन गुनवंता न भाऊज ला दातरो मांगे अन् क्यारी , गमला म क झाडना ला खोयर खायर करन ला लागे . भाऊज न मनाई करी पन् गुनवंता न नी आयके . दिन भर खोयर खायर , छ्याट छुट कर कन् वोनऽ आंगना को चितरंग च पलटाय डाये . रात कन् दुय जना न खूब गोस्टी माता करी . दुसरऽ दिन वूई मारकिट भर हिंड्या . येक दुकानदार ला येनऽ मसीन की थोडीबुत जानकारी होती . वोनऽ वोक वरख क कंपनी म चवकसी कर कन् मसीन क बारा म पुसे . या मसीन दुसरऽ राज्य क स्यहर म बनस , यकी वोला मालूमात भयी . वोनऽ कंपनी म चवकसी कर कन् दुकानदार न मोलभाव पुसे , मंग गुनवंता ला सांगे . गुनवंता न संगरे अनाज को हिसाब लगाये . वूई पयसा मसीन साठी पुरत नी होता . गुनवंता न या बात दोस्त ला सांगी . दोस्त न ब्याज क पयसा को इलाज सांगे . गुनवंता ला दोस्त की गोस्ट पटी . गुनवंतो वापिस गाव आयो .
वोनऽ दरन क भाव ला आब पायली हिसाब कन् करे . आपलऽ गडी ला वोनऽ अगलबगल क गाव म पठायकन् मसीन क घटी की जानकारी देयी . आब वोकऽ चक्की पर गाव क बाहिर को बी दरन आवन ला लाग्यो . वोकी चक्की दिन भर चालन ला लागी . गुनवंता की कमाई बी बाहाडी .
येक दिन भाडा क बंडी म वोन अनाज भऱ्यो आन् मारकिट म बिक्यो . वूई पयसा लेयकन् गुनवंतो जिल्हा क स्यहर म आयो . दोस्त ला पयसा देया आन वूई दुकान म गया . बिजली मसीन को अडवांस देय कन् बुक करी . बाकी का पयसा ब्याज कन् दोस्त ल्यावनी वालो होतो . गुनवंता ला वोनऽ पयसा की हर मह्यना की किस्त भरनो लागत होती . येक दिन टेंपू म वकी बिजली मसीन गाव म आयी . मसीन क फिटिंग साठी लागनारो सामान गुनवंता न लाय कन् धरेतो . टेंपू संग च मिस्तरी बी आयेतो . गुनवंता न दुय मजूर येन काम साठी थांबाड्याता . वोका सोबती खाती न बाडी बी आया . सबन न मिरकन् काम कऱ्ये . तीन दिन म वा मसीन पुरी फिट भयी . आपलऽ घर आन् आवार म बिजली फिटिंग करकन् बलब लगाया . जसी वोनऽ मसीन चालू करी , वूसो वको घर - आवार झगझग झलाऱ्यो . गाववालाना न येतरो उजिड गाव म कबच नी देख्योतो . पह्यले गुनवंता ला बह्याड कवनी वाला लोगना आब वोकी तारीफ करन ला लाग्या .
गुनवंता न गाववालाना ला कह्ये क , तुमी अरधऽ घंटा क रोजी को अनाज देयेन त मु तुमी ला येक येक बलब देऊन . पुरा त नी पर कई लोगना तयार भया .
गुनवंता न आब रात साठी बी येक नवकर धऱ्यो .
आब गुनवंता ला रोज १२ पासीन २० मानुस की रोजी भेटन ला लागी . वोमिन वू हर मह्यना की किस्त बी भरत होतो . ( क्रमशः )
लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
शानदार रचना
ReplyDeleteधन्यवाद नन्दलाल जी 🙏
Deletekhup sajri jankari
ReplyDeleteधन्यवाद जी 🙏
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