Friday, May 7, 2021

लागे लाक डाउन जी. ( भोयरी कविता ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

लागे लाक डाउन जी 
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

लागे लाक डाउन जी
काय करनु नी करनु
भयी मानुसकी दूर
केता नियम पारनु ।१।

भेव डोकसा म रह्ये
सपी हासी खुसी सारी 
रत्ति नहाय भरोसो
कोकी सकार कन् बारी ।२।

काम धंदा ला मनाई
घर बन गयो जेल
भयो जलम मरन
बिह्या लगन को खेल ।३।

असी बाप क राज म
देखी नही महामारी
बांध्या मुंडा ला मुसका
कपार प मुंडावरी ।४।

बाद भया मानमोरा
हारपीस सवासीन
दुय चार की बरात
संगऽ इथिन उथिन ।५।

बिह्या लाक डाउन को
दिखाडेस नवो ताल
अकसिद बी रुस्यास
सगा सोयरा बेहाल ।६।

भयो चुपचाप बिह्या
लागे जसो करे पाप
कोड्डी डोरा की भीर
उदास्यास मायबाप ।७।

जपो तन ला मन ला
धरो खुद प भरोसो
नेग दस्तुर क बिना
गाडजोडा ला जी कसो ।८।

सोडो अंगत पंगत
दुय थाटी दुय घास
जब पलटेन दिन
फेड लेजेन हवूस ।९।

जर आसुक भगावो
साफ सफाई धरम
दवादारु कसरत
इच दस्तुर नियम ।१०।

रचना : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

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