Wednesday, May 26, 2021

डोरा मिरुग सपन ( भोयरी कविता ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

डोरा मिरुग सपन
 Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

नातो भूई अगास को
रहे माय बाप वानी
जीव जंतू को आसरो
वोकनच जिंदगानी ।१।

पंचमहाभूत सार
घर दार आबादानी
भेदे तमाम असार
भारे तन मन पानी ।२।

डोरा मिरुग सपन
जिंदगानी की कहानी
झड भावना की लागी
मन आये ना बरानी ।३।

भूई कुस उजयेन
नवो जीव धरे बानी
ढेलो माती को धकाडे
दुय हात जोडस्यानी ।४।

ठेंब ठेंब अमरीत
तिस समिंदर वानी
उबडाये हिरदा ला
असो मिरुग गा दानी ।५।

रचना : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

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