Wednesday, May 19, 2021

दुनिया घुमी चाल बदली ( भोयरी कविता ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

दुनिया घुमी चाल बदली
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

सव येकड को खेत जोत्यो
सव रेंगी की बरात काढी
सव लोग क खटला साठी
आजा न बांधी महाल माडी ।१।

खंडी खंडी का पेव बी खंद्या 
खेत म चालती पाच जोडी
कुंई कुंई कर जाये मोट
वल्लीचिप जी भीर की फाडी ।२।

कठानकाडी बगिच्यो वोल्यो
खरा साठी मेरू मेढ गाडी 
गनगन भवरी गोल फिरी
मोठी नहानी बयीलजोडी ।३।

डाला डाला न अनाज बाटे
आयकरीना की भीड घाडी
पोरा दिवारी को मान मोठो
सिरपाव की जी चाल पडी ।४।

सीधा येव्हार का भोरा लोग
बू बहिन ला लुगडो साडी
आम्बा का पाव्हना करन ला 
दुय आतो साठी रेंगी धाडी ।५।

दुनिया घुमी चाल बदली
थ्रेसर ट्याक्टर आई गाडी
काम्बरकी को राज बदल्यो
नगद मोल का खाती बाडी ।६।

रचना : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

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