Saturday, May 15, 2021

तनखारा की नथनी. ( भोयरी कविता ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

तनखारा की नथनी
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

पाय तोरा मखमाली
छुम छुम पयजन
रंगी माहुर की लाली
दंग सजिलो साजन ।१।

लाजे हिरोंदी जोडवा
तनखारा की नथनी
चाली आखाड की हवा
गर्जी इज करधनी ।२।

सिंव्ह कम्बर लचिली
खाये झकोला मेखलो
रुत जवानी नसीली
चान्नी सुकीर दाखलो ।३।

सेव फिफोली कदर 
हास हमेल साकरी
बाजे काकन बिल्लोर
झलारस गरसोरी ।४।

चिट्टऽ हात प मयदी
झुल्यो मन सकवार 
चार आनी बोटऽ मुंदी
भुल्यो सखो भरतार ।५।

भारी कान म की बिरी
आंगऽ हिवरो गोंदन
नव गाव की जागीरी
तोरो बिह्या को आंदन ।६।

बोल पाखरू क वानी 
माये खोपा म अगास
सिक्कासल्ला येकदानी
तोरऽ हिरदा का दास ।७।

चाल तोरी मसतानी
खानदानी नजाकत
झिगे आरसी को पानी 
सूर्व्य कुकू की ताकत ।८।

तेज मुंडा प दिवा को 
मन बरसाद पानी
छवका बिनदिया को 
ताज कपार प मानी ।९।

गरा कारलो डोरलो
चांद सूर्व्या की बाटी
मोठो चलावे खटलो
जसी कुप की च काटी ।१०।

रचना : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर



4 comments:

  1. खूब साजरी रचना

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  2. मस्त अष्टाक्षरी रचना. येन अष्टाक्षरी मा भी नवीन विशेषता दिसी वा म्हणजे २रो ४थो ओरमा यमक त रव्हसेच पर १लो ३रो ओरमाभी अंत्य यमक साधेव गयी से.
    खूप सुंदर

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    1. येतरऽ आपलऽपन कन् कविता ला वानाये.. वकी जानकारी देई.. मन पासिन धन्यवाद जी 🙏🙏

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