जय जवान जय किसान
Bhoyari poem _ भोयरी कविता
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
रह्या भूखा न कऱ्या उपास
दिन दसरो उठ्यो तुफान
लाल बहादूर शास्त्री जी बोल्या
जय जवान जय किसान ।धृ।
धोको देये सरहद पर
लागे चीन को जह्यरी पान
फुल गुलाब को कोमाये जी
भाईबंदकी को टुट्यो मान ।१।
भयी तंगी पयसा पानी की
दानापानी कन परेस्यान
डेंडू हिवरो सरप काचे
माय भारत की उजरी स्यान ।२।
करे कब्जो लाहोर पातुर
वीर फऊज न बढाये मान
ठेसे मुंडो पापी राकस को
भये पाकिस्तान दानोफान ।३।
बारे पुतरो रावन को जी
देखे रामलीला मयदान
देस साठी कऱ्या अरपन
तन मन धन को जी दान ।४।
देस भारत को नवो नारो
जय जवान जय किसान
करे रकस्यन भरे पेट
गारे घाम करे बलिदान ।५।
उभा अटल सरहद प
म्हरा देस का वीर जवान
दिन रात कस्ट करकन
लाये अनाज म्हरो किसान ।६।
घाम रगत रोज बहाये
धरे आमारो केतरो ध्यान
म्हरऽ देस का जय विजय
जय जवान जय किसान ।७।
राम लक्षुमन देव तुमी
किस्न बलराम को स मान
भोज बिकरम क रूप म
जय जवान जय किसान ।८।
रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
खूब साजरी कविता
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteजय हिन्द वन्देमातरम
ReplyDeleteजय जवान जय किसान
शानदार कविता